उत्तर प्रदेश के महोबा में अर्जुन सहायक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने अब आंदोलन का मन बना लिया है. इसी के तहत भारतीय हलधर किसान यूनियन ने मोर्चा खोलते हुए जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. ग्रामीणों ने मनाग की है, उनका पूरा क्षेत्र बांध की वजह से डूब क्षेत्र में है, लिहाजा पूरे इलाके को डूब क्षेत्र घोषित किया जाए. यही नहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर सात दिनों में कोई समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे.
इसके साथ ही यूनियन अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को भेजा है. जिसमें प्रशासन द्वारा घोषित डूब क्षेत्र को बदलकर ग्रामीणों को स्थिति देखते हुए फैसला लेने की मांग की गयी है. ग्रामीणों ने इस दौरान कलेक्ट्रेट पर जमकर नारेबाजी की.
15 प्रतिशत एरिया डूब क्षेत्र घोषित
भारतीय हलधर किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष जनक सिंह परिहार ने बताया कि गंज गांव का ये मुद्दा अर्जुन सहायक परियोजना और कबरई बांध से जुड़ा है, जिसकी वजह से गंज गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. उन्होंने कहा कि बांध की जल भराव क्षमता बढ़ने से गांव की लगभग 85 प्रतिशत कृषि भूमि पहले ही जलमग्न हो चुकी है. पूर्व में हुए तीन सर्वे में पूरे गांव को डूब क्षेत्र घोषित कर दिया गया था, जिसके चलते सिंचाई विभाग ने ग्रामीणों को नए निर्माण कार्य करने से भी रोक दिया था. लेकिन अब विभाग अपनी बात से पलट रहा है. वर्तमान में केवल 15 प्रतिशत हिस्से को ही डूब क्षेत्र में माना जा रहा है, जो किसानों के साथ सरासर नाइंसाफी है.
किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
यही नहीं जनक सिंह परिहार ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रशासन कुंभकर्णीय नींद में सोया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब किसानों के पास खेती की जमीन ही नहीं बची, तो वे अपने बच्चों का भरण-पोषण कैसे करेंगे? सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों को भी विभाग दबाकर बैठा है. अब आलम यह है कि घर की महिलाएं भी अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं.
मुख्यमंत्री, राज्यपाल और जल शक्ति मंत्री को भेजे गए इस ज्ञापन में किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. किसानों की मांग स्पष्ट है कि पूरे गंज गांव को डूब क्षेत्र घोषित किया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए. चेतावनी दी गई है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर जिला प्रशासन ने ठोस कार्यवाही नहीं की, तो भारतीय हलधर किसान यूनियन जिला कलेक्ट्रेट परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू कर देगी. किसानों ने साफ कर दिया है कि जय जवान-जय किसान के नारे के साथ वे अपने हक की लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.