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Maharashtra By Elections 2026: महाराष्ट्र की बारामती और राहुरी सीट के उपचुनाव का ऐलान, 23 अप्रैल को वोटिंग, जानें कब आएगा रिजल्ट?

महाराष्ट्र की बारामती और राहुरी विधानसभा सीटें पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति में अहम मानी जाती हैं. इन दोनों सीटों के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. दोनों ही सीटों पर विधायकों के निधन के बाद यह निर्वाचन क्षेत्र खाली हो गए थे. उपचुनाव के ऐलान के बाद अब राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. राहुरी सीट बीजेपी के शिवाजी कर्डीले और बारामती सीट अजित पवार के निधन के चलते खाली हुई है.

कब है इन दो सीटों पर चुनाव

महाराष्ट्र की दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 30 मार्च 2026 को अधिसूचना सूचना जारी होगी. 6 अप्रैल नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है और 7 अप्रैल नामांकन पत्रों की जांच की आखिरी तारीख है. 9 अप्रैल 2026 को उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है. वोटिंग की तारीख 23 अप्रैल और 4 मई 2026 को मतगणना होगी.

अजित पवार की बारामती सीट पर क्या है स्थिति?

बात बारामती की करें तो यह पुणे जिले में स्थित है और राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जाती है. यह सीट लंबे समय से शरद पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ मानी जाती है. यहां से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अजित पवार कई बार विधायक चुने गए. साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गोपीचंद पडलकर को बड़े अंतर से हराया था.

उस चुनाव में अजित पवार को 1,95,641 वोट मिले थे, जबकि गोपीचंद पडलकर को 30,376 वोट प्राप्त हुए थे. इस तरह अजित पवार ने 1,65,265 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो उस चुनाव में राज्य की सबसे बड़ी जीतों में से एक थी. सामाजिक समीकरण की बात करें तो बारामती में मराठा समुदाय सबसे प्रभावशाली माना जाता है. इसके अलावा धनगर, अन्य ओबीसी, दलित और मुस्लिम मतदाता भी यहां अच्छी संख्या में हैं. सहकारी चीनी मिलों, कृषि संस्थानों और सहकारी बैंकों के नेटवर्क के कारण इस क्षेत्र में पवार परिवार का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से मजबूत माना जाता है.

राहुरी विधानसभा सीट पर क्या हैं समीकरण?

वहीं अहिल्यानगर (पुराना नाम-अहमदनगर) जिले की राहुरी विधानसभा सीट मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्र है. यहां की राजनीति पर भी मराठा समुदाय का प्रभाव देखा जाता है, हालांकि माली, धनगर जैसे ओबीसी समुदायों के साथ दलित और मुस्लिम वोट भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार प्राजक्त तनपुरे ने जीत दर्ज की थी. उन्हें 1,09,234 वोट मिले थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शिवाजी कर्डीले को 85,908 वोट प्राप्त हुए थे. इस चुनाव में तनपुरे ने कर्डीले को 23,212 वोटों के अंतर से हराया था.

इसके बाद 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवाजी कर्डीले ने इस सीट पर वापसी करते हुए जीत दर्ज की. उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार प्राजक्त तनपुरे को लगभग 14,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया. अक्टूबर 2025 में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. उनके निधन के कारण यह सीट भी रिक्त हो गई और अब यहां उपचुनाव की संभावना को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं.

दोनों सीटों का महत्व क्यों?

पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति में इन दोनों सीटों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां स्थानीय सहकारी संस्थाओं, कृषि अर्थव्यवस्था और जातीय समीकरणों का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ता है. बारामती को जहां पवार परिवार की मजबूत पकड़ वाली सीट माना जाता है, वहीं राहुरी में अलग-अलग चुनावों में बीजेपी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है. ऐसे में दोनों सीटों के खाली होने के बाद संभावित उपचुनाव राज्य की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है.

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