रसोई गैस की किल्लत को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ ने अपने संपादकीय में कहा है कि देश में गैस और ईंधन की कमी साफ दिखाई दे रही है, लेकिन सरकार इसे स्वीकार करने के बजाय सच छिपाने की कोशिश कर रही है.
कई शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर पाने के लिए लोगों को एक से डेढ़ किलोमीटर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जबकि भाजपा के प्रवक्ता दावा कर रहे हैं कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है.
सामना के मुताबिक, मुंबई समेत कई शहरों में लोग रात से ही गैस सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लग रहे हैं. सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में इसी तरह की स्थिति दिखाई दे रही है. ऐसे में यह कहना कि देश में गैस की कोई किल्लत नहीं है, लोगों की परेशानी को नजरअंदाज करना है.
होटल और मेस पर भी पड़ा असर
सामना में कहा गया है कि गैस संकट का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. अनुमान के मुताबिक लगभग 40 प्रतिशत मेस, रेस्टोरेंट और फूड स्टॉल बंद हो गए हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिल रही है.
कई छोटे होटलों और ढाबों में अब गैस की जगह लकड़ी या कोयले के चूल्हों पर खाना बनाया जा रहा है. कुछ जगहों पर कोयले की दुकानों पर भी अचानक भीड़ बढ़ गई है. इससे साफ है कि लोग गैस के विकल्प तलाशने लगे हैं.
सरकार ने प्राथमिकता वाली आपूर्ति की बात कही
संपादकीय में यह भी कहा गया कि सरकार ने हाल ही में निर्देश दिया है कि जिन जगहों पर पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति होती है, उन्हें एलपीजी कनेक्शन वापस करना होगा. इसके साथ ही अस्पताल, श्मशान घाट, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर गैस देने की बात कही गई है.
लेख के अनुसार, यह फैसला खुद इस बात का संकेत है कि गैस की कमी बढ़ रही है. अगर वास्तव में गैस की कोई किल्लत नहीं होती, तो ऐसी प्राथमिकता तय करने की जरूरत ही नहीं पड़ती.
मुख्यमंत्री फडणवीस के बयान पर सवाल
संपादकीय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान पर भी सवाल उठाए गए हैं. लेख में कहा गया कि मुख्यमंत्री का कहना है कि सब कुछ ठीक है, जबकि जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं. लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और कई जगहों पर रसोई गैस की आपूर्ति बाधित है.
लेख में यह भी कहा गया कि सरकार को जनता को भरोसे में लेकर सच्चाई बतानी चाहिए. अगर यह वैश्विक संकट है, तो लोगों को इसके बारे में साफ-साफ जानकारी दी जानी चाहिए.
धार्मिक स्थलों तक पहुंची गैस की किल्लत
संपादकीय में दावा किया गया है कि गैस की कमी का असर धार्मिक स्थलों पर भी दिखाई दे रहा है. उदाहरण के तौर पर शिर्डी के साई बाबा मंदिर में प्रसाद के लड्डुओं की संख्या कम कर दी गई है. पहले जहां दो लड्डू दिए जाते थे, अब सिर्फ एक लड्डू दिया जा रहा है.
इसके अलावा प्रसादालय में मिलने वाले भोजन में भी कटौती की गई है. लेख में कहा गया कि जब धार्मिक संस्थानों तक गैस की कमी का असर पहुंच रहा है, तो सरकार को इस स्थिति को स्वीकार करना चाहिए.
कालाबाजारी और सुरक्षा की स्थिति
संपादकीय के अनुसार, गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी भी बढ़ रही है. कई जगहों पर एक सिलेंडर की कीमत पांच हजार रुपये तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं. इस कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
मध्य प्रदेश में गैस गोदामों और एजेंसियों को सशस्त्र पुलिस की सुरक्षा देनी पड़ रही है. वहीं राजस्थान में सिलेंडर लेकर जा रहे ट्रकों को रास्ते में रोकने की घटनाएं भी सामने आई हैं. दिल्ली में भीषण गर्मी के बावजूद लोग गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं.
सरकार से सच्चाई बताने की मांग
मौजूदा ईंधन संकट एक वैश्विक समस्या हो सकती है, लेकिन इसका समाधान झूठ बोलकर नहीं किया जा सकता. सरकार को जनता को वास्तविक स्थिति बतानी चाहिए ताकि लोग मानसिक रूप से तैयार हो सकें.
लेख में कहा गया कि यदि सरकार लोगों को भरोसे में लेकर सच बताने से बचती है, तो इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है. इसलिए सरकार और सत्तारूढ़ दल को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.