हिमाचल प्रदेश की राजनीति में साल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज होती दिख रही है. प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के अलावा एक तीसरे राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है. इस दिशा में पहल करते हुए पूर्व मंत्री और लाहुल के पूर्व विधायक रामलाल मार्कंडेय ने तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर विभिन्न जिलों के नेताओं से संपर्क अभियान शुरू किया है.
रामलाल मार्कंडेय इन दिनों प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं. हाल ही में कुल्लू में एक बैठक आयोजित करने के बाद वे दो दिवसीय प्रवास पर हमीरपुर पहुंचे. यहां उन्होंने कई नेताओं से मुलाकात कर तीसरे मोर्चे की संभावनाओं पर चर्चा की.
उनका कहना है कि पहले प्रदेश के लोगों और नेताओं की राय ली जाएगी, उसके बाद ही औपचारिक रूप से तीसरा मोर्चा बनाने की घोषणा की जाएगी.
पहले संगठन मजबूत करने की योजना
बैठकों में शामिल असंतुष्ट नेताओं ने यह भी तय किया है कि तीसरे मोर्चे को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार किया जाएगा. इसके बाद नेतृत्व और संगठन की संरचना को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
बताया जा रहा है कि इस पहल से जुड़े कई नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छा जनाधार है, जिससे इस प्रयास को बल मिल सकता है.
कुल्लू बैठक में कई वरिष्ठ नेता हुए शामिल
हाल ही में कुल्लू जिले में हुई बैठक में करीब 6 पूर्व मंत्री और लगभग 40 नेता शामिल हुए थे. इनमें कई ऐसे नेता भी थे जिन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने टिकट नहीं दिया था. इन नेताओं का मानना है कि प्रदेश में लोगों के सामने एक नया राजनीतिक विकल्प होना चाहिए, जिससे राजनीति में नई दिशा मिल सके.
भाजपा-कांग्रेस के नेताओं से भी संपर्क
हमीरपुर में बातचीत के दौरान रामलाल मार्कंडेय ने बताया कि जल्द ही तीसरा मोर्चा संगठनात्मक रूप से खड़ा किया जाएगा. इसके साथ ही प्रदेश के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए एक मेनिफेस्टो भी जारी किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि जो लोग मौजूदा राजनीति से निराश हैं, उन्हें एक नया मंच मिल सके.
कई पूर्व विधायकों से की मुलाकात
अपने दौरे के दौरान मार्कंडेय ने कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की. बुधवार सुबह उन्होंने स्वर्गीय जगदेव चंद ठाकुर के घर जाकर उनके बेटे और पूर्व विधायक नरेंद्र ठाकुर से चर्चा की.
इसके बाद वे पूर्व शिक्षामंत्री ईश्वरदास धीमान के घर पहुंचे और उनके बेटे तथा पूर्व विधायक अनिल धीमान से भी बातचीत की. साथ ही पूर्व विधायक कमलेश कुमारी और बड़सर के पूर्व विधायक बलदेव शर्मा से भी तीसरे विकल्प को लेकर राय ली गई.
आगे शिमला, सोलन और सिरमौर का दौरा
दोपहर बाद मार्कंडेय सरकाघाट के पूर्व विधायक कर्नल इंद्र सिंह से मिलने पहुंचे और उनसे भी राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की. इसके अलावा बिलासपुर जिले में भी भाजपा और कांग्रेस के कुछ पूर्व विधायकों तथा नेताओं से संपर्क साधा जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, शाम के समय शिमला में भी कुछ नेताओं के साथ बैठक प्रस्तावित है. इसके बाद सोलन और सिरमौर जिलों में भी नेताओं से बातचीत की जाएगी.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह पहल आगे बढ़ती है तो हिमाचल की राजनीति में 2027 के चुनाव से पहले नया समीकरण बन सकता है. हालांकि फिलहाल यह प्रक्रिया रायशुमारी और संपर्क तक ही सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसके परिणाम स्पष्ट हो सकते हैं.