हरियाणा में सोमवार को राज्यसभा की दो सीट के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संजय भाटिया और कांग्रेस पार्टी के करमवीर सिंह बौद्ध को निर्वाचित घोषित किया गया. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देर रात संवाददाता सम्मेलन में दोनों नेताओं को उनकी जीत पर बधाई दी. हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भी पार्टी के आलाकमान से लेकर कार्यकर्ताओं तक को बधाई दी. हालांकि मतदान के दौरान ही अगर इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) ने मतदान से पीछे हटने का फैसला नहीं लिया होता तो चुनाव और दिलचस्प हो सकता था. खुद हरियाणा के सीएम ने भी यही दावा किया.
हरियामा में दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार – बीजेपी के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल चुनाव मैदान में थे. नांदल ने साल 2019 में भी बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे.
मुख्यमंत्री सैनी ने निर्दलीय उम्मीदवार द्वारा प्राप्त कुल वोट का हवाला देते हुए कहा कि नांदल, कांग्रेस उम्मीदवार से मामूली अंतर से हार गए. सैनी ने दावा किया कि कांग्रेस के पांच विधायकों ने ‘क्रॉस-वोटिंग’ की. उन्होंने बताया कि कांग्रेस के चार विधायकों के वोट अमान्य घोषित कर दिए गए.
मुख्यमंत्री सैनी ने चुनाव को रोचक बताया और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उस पर अपने विधायकों को बंधक बनाकर अलग-अलग जगहों पर स्थानांतरित करने का आरोप लगाया. उन्होंने मतदान से कुछ ही दिन पहले कांग्रेस विधायकों को हिमाचल प्रदेश स्थानांतरित किए जाने का जिक्र किया. पार्टी के ये विधायक सोमवार सुबह हिमाचल प्रदेश से चंडीगढ़ लौटे.
सैनी ने कहा, ‘मैंने पहली बार देखा कि कांग्रेस को अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है.’ सैनी ने कहा कि कांग्रेस ‘खत्म’ हो चुकी है और उसका ‘कोई भविष्य नहीं’ है. मुख्यमंत्री ने मतदान से अनुपस्थित रहने के लिए इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) की कड़ी आलोचना की और कहा कि इसने कांग्रेस की ‘बी टीम’ के रूप में काम किया.
भूपिंदर सिंह हुड्डा ने क्या कहा?
चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के प्रवेश करने के बारे में एक सवाल के जवाब में सैनी ने कहा, ‘वे किसी को चुनाव लड़ने से कैसे रोक सकते हैं?’ हरियाणा विधानसभा में इनेलो के दो सदस्य हैं, पार्टी ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. पार्टी नेताओं अभय सिंह चौटाला और आदित्य देवी लाल ने कहा कि उन्होंने जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया.
उधर कांग्रेस की हरियाणा इकाई के प्रभारी महासचिव बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि क्रॉस-वोटिंग करने वाले और ‘कांग्रेस के साथ विश्वासघात’ करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
क्रॉस-वोटिंग करने वाले कांग्रेस विधायकों के बारे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं उनके नाम नहीं लूंगा, लेकिन लोगों को समझ आ गया है और जनता उन्हें सबक सिखाएगी.’ हुड्डा ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा, ‘उन्होंने हर तरह की चाल चली. लेकिन कांग्रेस ने ‘अग्नि परीक्षा’ (एक सीट जीतकर) पास की.’
नब्बे सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में बीजेपी के 48 विधायक, कांग्रेस के 37, इनेलो के दो विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायक हैं.