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Gorakhpur News: रमजान के आखिरी दिनों में बाजार गुलजार, ईद की खरीदारी तेज

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इन दिनों रमजान और ईद की तैयारियों को लेकर लोगों में एक अजब ही उत्साह देखा जा रहा है. सेवईंयों की खरीदारी में तेजी है. बाजार में रौनक है. दिन रात बाजार गुलजार नजर आ रहा है. ईद के लिए रेती, शाह मारूफ, गोलघर, जाफरा बाजार, रसूलपुर, जाहिदाबाद आदि सज चुका है. खरीदारी जोरों पर है. लोग यहीं से ईद की खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं.

ज्वैलरी, कपड़ा, बैग, चूड़ियां, रेडीमेड गारमेंट्स, क्राकरी सहित जरूरत का हर सामान यहां मिल रहा है. बाजार में जूता, चप्पल, प्लास्टिक व अन्य धातुओं के बर्तन, शीशे का समान, टोपी, इत्र, आर्टीफिशियल ज्वैलरी उचित मूल्य पर मिल रही है. कुर्ता पायजामा, शर्ट-पैंट, सलवार सूट के कपड़ों की खूब बिक्री हो रही है. सुबह दुकान खुल रही है तो देर रात तक चल रही है. शाम होते ही बाजार बिजली की रोशनी में नहा जा रहा है.

रोजेदारों ने अल्लाह की इबादत कर मांगी दुआ 

बुधवार को 21वां रोजा मुकम्मल हो गया. अब रोजा थोड़ा लंबा होता जा रहा है. माह-ए-रमजान का तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का चल रहा है. हर तरफ नूरानी समां है. मस्जिदों व घरों में इबादत जारी है. रोजेदारों की इबादतों में कोई कमी नहीं है. एतिकाफ करने वाले इबादत में मश्गूल हैं. रोजेदार इबादत कर पूरी दुनिया में शांति व भाईचारे की दुआ मांग रहे हैं. गाजी रौजा गाजी मस्जिद में हाफिज मोहम्मद हम्माद ने तरावीह नमाज में एक कुरआन-ए-पाक मुकम्मल किया. उन्हें तोहफों से नवाजा गया 

हजरत अली को शिद्दत से किया याद, खूनीपुर में बांटा फल

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में 21 रमजान को अमीरुल मोमिनीन हजरत सैयदना अली रदियल्लाहु अन्हु के शहादत दिवस पर फातिहा ख्वानी व‌ दुआ ख्वानी कर अकीदत का नजराना पेश किया गया. मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में महफिल हुई. अल मुस्तफा कमेटी ने मदरसा अंजुमन इस्लामिया खूनीपुर के पास जरूरतमंदों में फल बांटा. ललू ललाई मस्जिद खूनीपुर में फातिहा ख्वानी की गई. फल बांटने में मो. शुएब, मो. आमिर, मो. जीशान, मो. सदफ, अयान सिद्दीकी, पार्षद नूर मोहम्मद, मिनहाजुद्दीन अंसारी, मोइन खान, शहजादे कुरैशी, सोनू, नदीम कादरी, आमान अली, हसन जैद, बब्लू आदि शामिल रहे.

सब्जपोश हाउस मस्जिद में हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दामाद व मुसलमानों के चौथे खलीफा हजरत अली की शहादत 21 रमजान को हुई. आप दामादे रसूल हैं. दो जन्नती जवानों के सरदार हजरत इमाम हसन व हजरत इमाम हुसैन के वालिद हैं. खातूने जन्नत हजरत फातिमा जहरा के शौहर हैं. हजरत अली का जिक्र करना भी इबादत में शुमार है.

मदीना मस्जिद में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान है कि जिसका मैं मौला, अली भी उसके मौला. जिसका मैं आका, अली भी उसके आका. जिसका मैं रहबर, अली भी उसके रहबर. जिसका मैं मददगार, अली भी उसके मददगार. हजरत अली का बहुत बड़ा मर्तबा है. हमें भी हजरत अली के नक्शे-कदम पर चलने की पूरी कोशिश करनी चाहिए तभी दुनिया व आखिरत में फायदा होगा.

कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि हजरत अली इल्म का समंदर हैं  बहादुरी में बेमिसाल हैं. आपकी इबादत, रियाजत, परहेजगारी और पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व सहाबा किराम से मुहब्बत की मिसाल पेश करना मुश्किल है. हजरत अली फरमाते हैं कि अल्लाह की कसम मैं कुरआन की आयतों के बारे में सबसे ज्यादा जानने वाला हूं. पैगंबर-ए-इस्लाम ने फरमाया कि मैं इल्म का शहर हूं और अली उसके दरवाजा हैं. अब जो इल्म से फायदा उठाना चाहता है वह बाबे इल्म से दाखिल हो. अंत में सलातो-सलाम पढ़कर पूरी दुनिया में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई. 

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