माह-ए-रमजान का 22वां रोजा करीब 13 घंटे 24 मिनट का रहा जो अल्लाह की इबादत और कुरआन की तिलावत में बीता. रमजान का अंतिम अशरा यानी जहन्नम से आजादी का दौर जारी है. मस्जिदों और घरों में इबादत का सिलसिला बदस्तूर जारी है. गुरुवार को शबे कद्र की दूसरी ताक रात में खूब इबादत हुई और अल्लाह के बंदों ने गुनाहों से माफी मांगी. इसी बीच बाजारों में ईद की खरीदारी भी जोरों पर है. रेती, शाह मारुफ, घंटाघर, जाफरा बाजार और गोरखनाथ इलाकों में खरीदारों की खासी चहल-पहल देखी जा रही है.
अलविदा जुमा आज, दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक नमाज
आज माह-ए-रमजान का अंतिम जुमा यानी अलविदा जुमा है. शहर की तमाम मस्जिदों में इंतजाम मुकम्मल कर लिए गए हैं. मस्जिदों की साफ-सफाई, दरी, चटाई और पानी की समुचित व्यवस्था कर ली गई है. दोपहर 12:30 बजे से 2:30 बजे तक सभी मस्जिदों में जुमा की नमाज अदा की जाएगी. मस्जिदों में तकरीर और अलविदाई खुत्बा होगा जिसके बाद दो रकात जुमा की फर्ज नमाज और विशेष दुआ होगी. सबसे अंत में चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में दोपहर 2:15 बजे और सुन्नी जामा मस्जिद सौदागार मोहल्ला बसंतपुर में 2:30 बजे नमाज अदा होगी.
मुफ्ती-ए-शहर बोले रमजान के जाने का गम और ईद की खुशी साथ-साथ
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि रमजान के आखिरी जुमा को अलविदा या जुमातुल विदा भी कहते हैं. जुमा को दिनों का सरदार कहा जाता है इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. इसे छोटी ईद या हफ्ते की ईद भी कहा जाता है. रमजान के आखिरी जुमा की नमाज से इस रहमत भरे महीने के जाने का गम भी होता है और ईद के आने की खुशी भी.
जाफरा बाजार मस्जिद में 12 से 19 साल के 12 युवा एतिकाफ में
माह-ए-रमजान के अंतिम अशरे में मस्जिदों में बड़ों के साथ युवा भी एतिकाफ में मग्न हैं. जाफरा बाजार स्थित सब्जपोश हाउस मस्जिद में 12 से 19 वर्ष की उम्र के 12 युवा एतिकाफ में बैठे हैं जिनमें मुहम्मद जैद, मुहम्मद आसिफ रजा, मुहम्मद रूशान, अहमद रजा, मुहम्मद आकिब अंसारी, मुहम्मद शाद, अब्दुस्समद, अली हम्जा और रहमत अली सहित अन्य शामिल हैं. कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी और इमाम हाफिज रहमत अली निजामी इन युवाओं का हौसला बढ़ा रहे हैं. इसी मस्जिद में 80 वर्षीय हाजी रफीउल्लाह भी एतिकाफ में बैठे हैं.
शहर काजी बोले रमजान ने दिखाया कामयाबी का रास्ता
शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि रमजान एक बेहतरीन माह है जिसमें अल्लाह की रहमतें बढ़ जाती हैं और दुआएं कुबूल होती हैं. उन्होंने कहा कि रमजान ने कामयाबी का रास्ता दिखा दिया है अब हमारी जिम्मेदारी है कि उस पर मजबूती से चलें. नमाज की पाबंदी करें, जकात और फित्रा जल्द जरूरतमंदों तक पहुंचाएं और रो-रोकर दुआ मांगें.