What Diseases Are Caused By Contaminated Water: उत्तराखंड में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत किए गए ऑडिट में गंगा नदी की स्थिति को लेकर कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं. सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच गंगा के पानी में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा लगभग 32 गुना तक बढ़ी हुई पाई गई. इसके अलावा कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के तय मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि लगभग 32 प्रतिशत एसटीपी बिना शोधन किए हुए सीवेज को सीधे गंगा में छोड़ रहे हैं. यह ऑडिट 2018 से 2023 के बीच उत्तराखंड में नमामि गंगे कार्यक्रम के क्रियान्वयन की समीक्षा के दौरान किया गया था. यह रिपोर्ट बजट सत्र के दौरान गैरसैंण में आयोजित उत्तराखंड विधानसभा में पेश की गई.
क्या बताया गया है रिपोर्ट में?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि गंगा किनारे बसे शहरों में इस योजना के कई हिस्सों का सही तरीके से लागू नहीं हो पाया. राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के तहत बनाए गए कुछ श्मशान घाटों का उपयोग बहुत कम हो रहा है, क्योंकि लोगों के बीच इसके बारे में पर्याप्त अवेयरनेस नहीं फैलाई गई. इसके अलावा परियोजना के तहत वनीकरण से जुड़े कार्यों में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई. रिपोर्ट के अनुसार योजना के लिए जो खर्च निर्धारित किया गया था, उसमें से केवल लगभग 16 प्रतिशत राशि ही प्रभावी रूप से इस्तेमाल की जा सकी.
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क्या होती है इससे बीमारियां?
यूएन की विशेष हेल्थ एजेंसी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, दूषित पानी और खराब स्वच्छता कई गंभीर बीमारियों के फैलने का कारण बन सकते हैं. इनमें हैजा, दस्त, पेचिश, हेपेटाइटिस ए, टाइफाइड और पोलियो जैसी बीमारियां शामिल हैं. यदि पानी और स्वच्छता से जुड़ी सेवाएं पर्याप्त न हों या उनका सही प्रबंधन न किया जाए, तो लोगों को कई तरह के स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है. यह समस्या स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों में और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि वहां मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों के लिए इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
आंकड़ों के अनुसार हर 100 मरीजों में से लगभग 7 मरीज विकसित देशों के अस्पतालों में और करीब 15 मरीज निम्न व मध्यम आय वाले देशों के अस्पतालों में इलाज के दौरान किसी न किसी संक्रमण का शिकार हो जाते हैं. इसका एक बड़ा कारण पानी और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं की कमी भी माना जाता है.
पानी क्यों हो रहा है दूषित?
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में बताया गया कि शहरी, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी का सही प्रबंधन न होने की वजह से करोड़ों लोगों के पीने का पानी प्रदूषित हो रहा है. कई बार भूजल में प्राकृतिक रूप से मौजूद केमिकल भी हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. उदाहरण के लिए आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे तत्व भूजल में पाए जा सकते हैं. वहीं कुछ रसायन, जैसे सीसा , पानी की सप्लाई व्यवस्था के संपर्क में आने से भी पीने के पानी में मिल सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.