दिल्ली मेट्रो के साथ एक शख्स का ऐसा अनोखा रिश्ता है, जिसने पिछले 24 सालों से हर नए मेट्रो कॉरिडोर के उद्घाटन के दिन पहली ट्रेन में सफर करने की परंपरा को निभाया है. इस अनोखे लगाव और समर्पण के लिए केंद्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने दिल्ली मेट्रो के प्रति अनोखी दीवानगी रखने वाले यात्री को सम्मानित किया.
दिल्ली में हुआ सम्मान समारोह
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने 11 मार्च को नई दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के समर्पित प्रशंसक अनिल मारवाह को सम्मानित किया. इस अवसर पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक डॉ. विकास कुमार भी मौजूद रहे. समारोह में मारवाह की उस अनोखी उपलब्धि को सराहा गया, जिसके तहत उन्होंने दिल्ली मेट्रो के हर नए कॉरिडोर के उद्घाटन दिवस पर पहली ट्रेन में सफर किया है.
24 सालों से निभा रहे अनोखी परंपरा
अनिल मारवाह पिछले 24 लगातार सालों से इस अनूठी परंपरा को निभाते आ रहे हैं. दिल्ली मेट्रो के इतिहास में वह उन लोगों में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने इस आधुनिक परिवहन प्रणाली के सफर को बेहद करीब से देखा और महसूस किया है. उनकी यह प्रतिबद्धता दिल्ली मेट्रो के प्रति लोगों के लगाव और भरोसे की एक अलग ही मिसाल पेश करती है.
2002 की पहली यात्रा आज भी यादगार
मारवाह ने बताया कि उन्होंने 2002 में दिल्ली मेट्रो की पहली यात्रा की थी. उनके अनुसार उस समय मेट्रो ने भारत के शहरी परिवहन में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत की थी. मेट्रो के आने से शहर में कनेक्टिविटी बेहतर हुई और सड़क आधारित परिवहन पर निर्भरता कम होने लगी.
लाखों यात्रियों के लिए भरोसेमंद साधन बनी मेट्रो
उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो की समयबद्धता, विश्वसनीयता और सुविधा ने लाखों यात्रियों की यात्रा को आसान बना दिया है. इससे रोजमर्रा की भागदौड़ और ट्रैफिक के तनाव से भी काफी राहत मिली है. यही वजह है कि आज मेट्रो राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन का सबसे प्रभावी और लोकप्रिय साधन बन चुकी है.
अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शिता का परिणाम
इस मौके पर मंत्री तोखन साहू ने अनिल मारवाह को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी कहानियां दिखाती हैं कि दिल्ली मेट्रो के साथ लोगों का भावनात्मक जुड़ाव कितना मजबूत है. उन्होंने कहा कि मेट्रो केवल एक परिवहन व्यवस्था नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के बुनियादी ढांचे के विकास का प्रतीक है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस परियोजना की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कार्यकाल में हुई थी, जिसकी दूरदर्शिता ने देश में मेट्रो नेटवर्क के तेजी से विस्तार की नींव रखी.