‘निवेश करो, दोगुना कमाओ’, यह लालच पुराना है लेकिन इसके जाल में फंसने वाले आज भी कम नहीं हैं. पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ भी यही हुआ. ज्यादा मुनाफे के सपने दिखाए गए, भरोसा जीता गया और देखते-देखते उनके 1 करोड़ 31 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में चले गए. लेकिन इस बार ठगों का नेटवर्क देहरादून एसटीएफ की पकड़ से बच नहीं सका. देहरादून की स्पेशल टास्क फोर्स ने महाराष्ट्र के ठाणे और पालघर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया है.
कैसे बिछाया गया जाल?
श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल निवासी पीड़ित से संपर्क किया गया और निवेश पर असाधारण मुनाफे का लालच दिया गया. शुरुआत में छोटी रकम पर अच्छा रिटर्न दिखाकर विश्वास बनाया गया. यह साइबर ठगों का सबसे पुराना और आजमाया हुआ तरीका है. जब पीड़ित पूरी तरह भरोसे में आ गया तो रकम बढ़ती गई और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 31 लाख रुपये जमा करा लिए गए.
जब पैसे वापस मांगे तो आरोपी या तो टालमटोल करते रहे या फिर गायब हो गए. तब पीड़ित ने देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.
एसटीएफ ने ऐसे सुलझाई गुत्थी
मामला दर्ज होते ही एसटीएफ ने आरोपियों की तलाश में विशेष टीमें लगा दीं. जांच के दौरान टीम ने उन बैंक खातों को खंगाला जिनमें रकम ट्रांसफर हुई थी. साथ ही ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों की डिजिटल ट्रेसिंग की गई. धीरे-धीरे एक-एक धागा सुलझता गया और निशाना महाराष्ट्र पर आकर टिका. टीम ने ठाणे और पालघर में दबिश दी और तीनों आरोपियों को मौके पर दबोच लिया.
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
पकड़े गए तीनों आरोपियों की पहचान प्रतीक उत्तम बाफना (32 वर्ष), आशीष कुमार (27 वर्ष) और मोहम्मद श्रिम उर्फ नासिर (31 वर्ष) के रूप में हुई है. तीनों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. एसटीएफ अब इनके और संपर्कों और नेटवर्क की जांच में जुटी है.
SSP एसटीएफ की जनता से अपील
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने इस गिरफ्तारी के बाद लोगों से सीधी अपील की है. उन्होंने कहा कि अनजान नंबरों से आने वाली कॉल या वीडियो कॉल पर कभी भी कोई निजी जानकारी साझा न करें. पुलिस, CBI या ED के नाम पर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाने वालों से सतर्क रहें. कोई भी सरकारी एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती. टेलीग्राम या यूट्यूब आधारित कमाई की योजनाओं से दूर रहें और कम समय में ज्यादा मुनाफे के झांसे में कभी न आएं.
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को साइबर ठगी की आशंका हो तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं. जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा रहती है.