देहरादून के राजपुर थाना क्षेत्र में जमीन घोटाले का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक व्यक्ति को उसके ही कारोबारी साझेदार (पार्टनर) और जमीन की मालकिन ने गहरी साजिश रचकर साढ़े सत्तासी (87.5) लाख रुपये का चूना लगा दिया. पीड़ित को न केवल उसके पैसे से हाथ धोना पड़ा, बल्कि उसे जमीन के अधिकार से भी बाहर कर दिया गया. पुलिस ने तहरीर के आधार पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है.
अधोईवाला निवासी पीड़ित अजीत कुमार के अनुसार, मौजा धनौला (परगना परवादून) स्थित 3549.85 वर्गमीटर जमीन का सौदा 26 जून 2024 को हुआ था. इस जमीन की मालकिन नीरजा धनकर (निवासी विकासपुरी, दिल्ली) हैं. सौदे की कुल कीमत 1.75 करोड़ रुपये तय हुई थी. इस सौदे में दून हिल्स कॉलोनी निवासी संजय कुमार रावत भी अजीत का साझीदार था. अजीत ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई और रिश्तेदारों से मदद लेकर अपने हिस्से के 87.5 लाख रुपये का भुगतान किया था.
फर्जीवाड़े की पहली परत: एक जमीन, दो खरीदार
सौदे के बाद जब अजीत और संजय जमीन पर पहुंचे, तो वहां एक बड़ा राज खुला. पता चला कि नीरजा धनकर ने खसरा नंबर 18ग की 2700 वर्गमीटर जमीन पहले ही श्रीमती नेहा विनय सेठ को 1.47 करोड़ रुपये में बेच दी थी और उन्हें कब्जा भी दे दिया था. इस दोहरी बिक्री (Double Selling) के मामले में नेहा विनय सेठ ने 24 जुलाई 2024 को नीरजा के खिलाफ राजपुर थाने में FIR दर्ज कराई थी, जिसकी जांच अभी चल रही है.
पार्टनर का धोखा और दस्तावेजों में हेरफेर
अजीत को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उसे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के पास कुछ संदिग्ध दस्तावेज मिले. जांच करने पर पता चला कि उसके पार्टनर संजय ने नीरजा के साथ साठगांठ कर ली है. संजय ने 26 सितंबर 2025 को उसी संपत्ति का विक्रय पत्र फर्जी तरीके से अपने, अपनी पत्नी पूनम और भाई विजय के नाम करवा लिया. इतना ही नहीं, दस्तावेजों की तारीखों में भारी हेरफेर की गई और नीरजा धनकर ने 11 अगस्त 2025 को एक फर्जी अनुबंध (2 जुलाई 2024) का हवाला देकर अजीत से बाकी रकम की मांग का नोटिस भी भेज दिया.
बाहुबली को जमीन बेचने की धमकी और FIR
तहरीर के मुताबिक, 10 दिसंबर 2025 को जब अजीत अपनी जमीन पर गए, तो संजय कुछ लोगों के साथ वहां पहुंचा. उसने अजीत से अभद्रता की और धमकी दी कि वह यह जमीन किसी ‘बाहुबली’ को बेच देगा, जो उसे खुद ही वहां से खदेड़ देगा.
इस विवाद को लेकर दीवानी अदालत में पहले से ही एक वाद (288/2024) लंबित है. मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 मार्च 2026 को राजपुर थाना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. मामले की जांच उपनिरीक्षक अर्जुन सिंह को सौंपी गई है.