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Dehradun News: देहरादून में जमीन हड़पने का सनसनीखेज खेल, लापता बेटे को मृत दिखाकर बेची संपत्ति, FIR दर्ज

उत्तराखंड के देहरादून में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जिसमें जालसाजों ने लापाता बेटे को मृत दिखाकर जमीन किसी और के नाम पर करवाकर दूसरे को बेच दी. जब पीड़ित परिवार को जानकारी हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत करने के साथ मामले में कार्रवाई की मांग की है. यह खुलासा भी उस वक्त हुआ जब मालिकन ने भूलेख वेबसाइट पर जमीन का ब्योरा देखा.

फिलहाल इस मामले के सामने आने के बाद पूरे महकमे में हड़कम्प मच गया है. पीड़ित परिवार का बेटा 2004 से लापता है. इस मामले में विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका है.

क्या है पूरा मामला ?

शिकायतकर्ता अर्जुन सिंह भण्डारी, ने उत्तराखंड पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल को दी अपनी शिकायत में बताया कि लाखीराम कंसवाल की भूमि खाता संख्या 1833, खसरा संख्या 757, रकबा 406 वर्गमीटर, मौजा अजबपुर खुर्द, जिला देहरादून में स्थित है. इस जमीन के असली वारिस उनके दो पुत्र विनोद कंसवाल और राकेश कंसवाल हैं जिनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है. 2004 में विनोद कंसवाल मुंबई के विरार इलाके से अचानक लापता हो गए थे. उस वक्त उनके परिवार ने विरार थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट 2004  मे दर्ज कराई गई थी. इसी लापता होने की आड़ में आरोपी प्रदीप सकलानी, पुत्र भूदेव सकलानी ने अपना जाल बुनना शुरू किया.

पहले तो प्रदीप सकलानी ने अर्जुन की माता के पुत्र विनोद कंसवाल को फोन कर कहा कि उन्हें यह जमीन पसंद है और वो इसे खरीदना चाहते हैं. जमीन दिखाने के दौरान उसने बताया कि दोनों भाइयों के नाम जमीन दर्ज है और छोटा बेटा 2004 से लापता है. इसलिए जमीन नहीं बेची जा सकती. फिर प्रदीप ने एक नया पैंतरा चला, उसने कहा कि वो राकेश कंसवाल के सम्बंध में सिविल न्यायालय में वाद दिलवाएगा, वाद के निर्णय के बाद जमीन की अटॉर्नी लिए हुए अर्जुन का नाम विरासत में दर्ज होगा और फिर जमीन बेचने का रास्ता साफ हो जाएगा.

इसी बहाने प्रदीप सकलानी ने परिवार से गुमशुदा राकेश की प्रथम सूचना रिपोर्ट की कॉपी, जमीन की खतौनी और अन्य जरूरी कागजात ले लिए. साथ ही आधार कार्ड की छायाप्रति भी हासिल कर ली. उसके बाद प्रदीप ने फोन उठाना बंद कर दिया.

भूलेख वेबसाइट पर जाकर खतौनी देखी तो उड़ गए होश

जब परिवार ने भूलेख वेबसाइट पर जाकर खतौनी देखी तो सारा सच सामने आ गया. प्रदीप सकलानी ने गुमशुदा राकेश कंसवाल का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जी उत्तरजीवी प्रमाण पत्र, धर्मपुर पार्षद अमित भण्डारी का फर्जी प्रमाण पत्र, फर्जी शपथ पत्र और फर्जी आवेदन तैयार करवाए. यहां तक कि परिवार के सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर और पवन कुमार नाम के व्यक्ति का आधार कार्ड बनाकर झूठी गवाही दिलाई गई. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर राकेश को मृत दिखाकर विरासत में अर्जुन का नाम चढ़ा दिया गया और फिर उनका मकान बंद करवा दिया.

फर्जी कागजात बना कर बेच दी जमीन

 जमीन की इस पूरी साजिश के बाद प्रदीप सकलानी ने यह संपत्ति बलबीर भण्डारी पुत्र हनुमान सिंह भण्डारी तथा दिनेश उनियाल पुत्र कृष्णानंद उनियाल एवं उनकी पत्नी श्रीमती इंदु उनियाल को बेच दी. बताया जाता है कि दोनों खरीदारों ने इंडियन बैंक से कर्ज लेकर यह जमीन खरीदी. प्रदीप की इस करतूत में उसकी पत्नी सन्ध्या सकलानी, मनोज भण्डारी और अजय सजवानी ने भी उसका साथ दिया.

आईजी के निर्देश पर हुई एफआईआर

परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी देहरादून तक गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आखिरकार 17 दिसंबर 2025 को उत्तराखंड पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया. उनके निर्देश पर 5 मार्च 2026 को थाना नेहरू कालोनी में FIR दर्ज की गई. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 120-B (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेज में जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) के तहत प्रदीप सकलानी व एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. जांच  उपनिरीक्षक दीपक सिंह पंवार को सौंपी गई है.

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