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Bihar News: रणवीर सेना प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने UPSC में लहराया परचम, 301वीं रैंक की हासिल

भोजपुर की आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल कर अपने जिले और परिवार का नाम रोशन किया है. आकांक्षा सिंह आरा जिले के पवना थाना क्षेत्र के खोपिरा गांव की रहने वाली हैं और वह रणवीर सेना के प्रमुख रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं. 

बता दें कि UPSC ने 6 मार्च को सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम जारी किया, जिसमें आकांक्षा की सफलता चर्चा का विषय बन गई. खास बात यह है कि आकांक्षा ने अपनी प्रेरणा अपने दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया को बताया, जिनकी साल 2012 में हत्या कर दी गई थी.

‘दादा जी का संघर्ष बना प्रेरणा का स्रोत’

आकांक्षा सिंह ने अपनी सफलता के बाद कहा कि बचपन से ही वह अपने दादा के बारे में सवाल पूछती थीं. उन्होंने बताया कि जब से उन्हें होश आया, तब से वह परिवार से पूछती थीं कि उनके दादा कहां हैं, लेकिन उन्हें कभी सीधा जवाब नहीं मिला. बाद में जब वह बड़ी हुईं तो उन्हें पता चला कि उनके दादा लंबे समय तक जेल में रहे और समाज के लिए संघर्ष करते रहे. आकांक्षा ने कहा कि उनके दादा के संघर्ष के कारण उनका परिवार 10–20 साल पीछे चला गया, लेकिन वही संघर्ष उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बना. उन्होंने कहा कि आज भी वह अपने दादा को याद करके ही आगे बढ़ने की प्रेरणा लेती हैं.

माता-पिता व परिजनों को दिया सफलता का श्रेय

आकांक्षा सिंह ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को दिया. उन्होंने बताया कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने रोजाना 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की. उनके अनुसार इस परीक्षा में सफलता केवल पढ़ाई से नहीं मिलती, बल्कि निरंतरता, धैर्य और आत्मविश्वास भी उतने ही जरूरी होते हैं. उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए. आकांक्षा ने बताया कि पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमजोरियों पर काम करते हुए बेहतर तैयारी की. उसी का परिणाम है कि दूसरे प्रयास में ही उन्हें यह सफलता मिल गई.

कौन थे ब्रह्मेश्वर मुखिया?

दरअसल आकांक्षा सिंह के दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया बिहार के भोजपुर जिले के खोपिरा गांव के रहने वाले थे और उन्हें रणवीर सेना के संस्थापक के रूप में जाना जाता है. 1990 के दशक में बिहार में नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच संघर्ष के दौर में 1994 में उनके नेतृत्व में रणवीर सेना का गठन हुआ था. इस निजी सेना को उस समय बिहार की जातीय संघर्ष की राजनीति में अहम माना जाता था और नक्सली संगठनों से इसकी कई मुठभेड़ें भी हुईं. इन्हीं संघर्षों के चलते ब्रह्मेश्वर मुखिया लंबे समय तक जेल में रहे. साल 2011 में जेल से रिहा होने के बाद 2012 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. अब उनकी पोती आकांक्षा सिंह ने यूपीएससी में सफलता हासिल कर एक नई पहचान बनाई है.

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