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Baramati By Polls 2026: बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए तारीखों का ऐलान इसी महीने, अप्रैल में हो सकता है मतदान

महाराष्ट्र के बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव जल्द होने की संभावना है. यह सीट राज्य के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई है. भारत निर्वाचन आयोग अगले सप्ताह महाराष्ट्र की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इन दोनों सीटों के चुनाव की घोषणा पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ की जा सकती है.

सूत्रों के अनुसार, बारामती और राहुरी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा मार्च के दूसरे या तीसरे सप्ताह में हो सकती है. बारामती सीट पर उपचुनाव दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण होगा, जबकि राहुरी सीट पर चुनाव भारतीय जनता पार्टी के विधायक शिवाजीराव कर्डिले के निधन के कारण कराया जाएगा.

मार्च के दूसरे सप्ताह में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में विधानसभा चुनावों की घोषणा होने की संभावना है. इसी के साथ महाराष्ट्र की बारामती और राहुरी विधानसभा सीटों के उपचुनाव भी कराए जा सकते हैं.

सुनेत्रा पवार के खिलाफ लड़ेगा कोई चुनाव?

अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री पद संभाला. इसके बाद उनके लिए छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है. इसलिए लगभग तय माना जा रहा है कि सुनेत्रा पवार बारामती से उपचुनाव लड़ेंगी. उनके स्थान पर पार्थ पवार राज्यसभा गए हैं.

कुछ दिन पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कोर कमेटी की बैठक मुंबई में हुई थी. इस बैठक में यह तय किया गया कि सुनेत्रा पवार ही बारामती उपचुनाव में पार्टी की उम्मीदवार होंगी.

राहुरी विधानसभा सीट पर क्या है स्थिति?

वहीं राहुरी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक शिवाजी भानुदास कर्डिले का पिछले साल अक्टूबर में निधन हो गया था. तब से यह सीट खाली है, इसलिए अब यहां उपचुनाव होना है. राजनीतिक हलकों में इस बात पर नजर है कि इस सीट से भाजपा किसे उम्मीदवार बनाएगी.

इस बीच यह भी देखने वाली बात होगी कि सुनेत्रा पवार को बारामती उपचुनाव में निर्विरोध चुना जाता है या नहीं. अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र में अन्य राजनीतिक दल उनके सम्मान में उम्मीदवार न उतारें, ऐसी संभावना जताई जा रही है.

इस चुनाव को लेकर सांसद सुप्रिया सुले ने भी उम्मीद जताई है कि राजनीतिक शालीनता बनाए रखते हुए यह चुनाव निर्विरोध हो सकता है, क्योंकि यह उनके ‘दादा’ के निधन के बाद होने वाला चुनाव है.

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