सीहोर। जिले के लाड़कुई वन परिक्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक ओर लंबे समय से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगल की जमीन पर कब्जे और भू-माफियाओं की सक्रियता के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग ने वन भूमि पर कथित अवैध जुताई करते पाए गए एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर और कृषि उपकरण जब्त किए हैं। इस कार्रवाई के बाद विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप सामने आ रहे हैं कि क्षेत्र में लंबे समय से बड़े पैमाने पर वन भूमि पर कब्जे की गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन विभाग की कार्रवाई अपेक्षाकृत छोटे मामलों तक सीमित दिखाई देती है। हालांकि विभाग का कहना है कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा।
जानकारी के अनुसार वर्षा ऋतु की शुरुआत के साथ वन क्षेत्रों में अवैध जुताई और खेती के प्रयास बढ़ने की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में शुक्रवार सुबह लाड़कुई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत परिसर पिपलानी के कक्ष क्रमांक 369 आरएफ क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण की सूचना विभाग को प्राप्त हुई।
सूचना मिलने के बाद परिक्षेत्र सहायक पिपलानी ओम कुमार गोयल के नेतृत्व में वन अमला मौके पर पहुंचा। जांच के दौरान एक व्यक्ति लाल रंग के महिंद्रा ट्रैक्टर से वन भूमि पर बखरनी कर जमीन को खेती योग्य बनाने का प्रयास करता पाया गया।
वन अमले ने मौके पर कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति को रोका और दस्तावेजों की जांच की। पूछताछ में व्यक्ति ने अपना नाम जगदीश पिता नाहर सिंह निवासी सिराड़ी बताया। विभाग के अनुसार वन भूमि पर कृषि गतिविधि से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
इसके बाद वन विभाग ने बिना पंजीयन नंबर वाले महिंद्रा 585 डीआई एक्सपी प्लस ट्रैक्टर और कृषि उपकरण जब्त कर लिए। प्रारंभिक जांच में लगभग 0.337 हेक्टेयर वन भूमि पर जुताई कर अतिक्रमण का प्रयास किए जाने की बात सामने आई। मामले में भारतीय वन अधिनियम 1927 की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
वन विभाग ने यह भी बताया कि इससे पहले भी अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान नयापुरा क्षेत्र में कार्रवाई की गई थी। विभाग के अनुसार वहां 9 मामलों में वन भूमि पर कथित कब्जे और खेती के प्रयास पाए गए थे, जिसके बाद लगभग 10.125 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था।
हालांकि क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक समूहों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल छोटे मामलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका आरोप है कि यदि बड़े स्तर पर कब्जे की शिकायतें सामने आ रही हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रकाश चंद्र उईके ने कहा कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए विशेष दल गठित किए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी अवैध गतिविधियां सामने आएंगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वन क्षेत्रों में लंबे समय से सामने आ रहे बड़े स्तर के अतिक्रमण के मामलों पर भी इसी तरह प्रभावी और व्यापक कार्रवाई देखने को मिलेगी, या अभियान केवल सीमित मामलों तक ही रहेगा।
नोट: बड़े स्तर के अतिक्रमण संबंधी दावे स्थानीय आरोपों और क्षेत्रीय चर्चाओं पर आधारित हैं। इनकी अंतिम पुष्टि संबंधित विभागीय जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही मानी जाएगी।
