बुरहानपुर में 58वें शहज़ादा आसिफ़ ख़ाँ मुमताज़ महल महोत्सव का विविध सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और विरासत संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
महोत्सव की शुरुआत राष्ट्रीय संगोष्ठी से हुई, जिसका विषय था “History to Hashtag : Roots and Wings”। संगोष्ठी में वक्ताओं ने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक तथा सोशल मीडिया के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

इसके बाद ज़ैनाबाद स्थित राजा जयसिंह की छत्री और पान बाग़ में सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जहां शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण गुलमोहर मार्केट में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन रहा। देशभर से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रीय चेतना को स्वर दिया। कार्यक्रम में करीब 20 हजार श्रोताओं की उपस्थिति रही।
इस दौरान उपस्थित लोगों ने देश की ऐतिहासिक धरोहरों, पुरातात्त्विक स्मारकों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ स्वच्छ और जागरूक भारत के निर्माण का संकल्प भी लिया।
महोत्सव के संस्थापक शहज़ादा आसिफ़ ख़ाँ ने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बुरहानपुर की गौरवशाली विरासत, गंगा-जमुनी तहज़ीब और राष्ट्रीय एकता का उत्सव है।
