सड़क निर्माण में बाधा डालने के आरोप वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ‘RTI अब कई लोगों के लिए बिजनेस बन गया है’, PIL के दुरुपयोग पर भी दोहराई चिंता।
नई दिल्ली। सूचना का अधिकार (RTI) कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी है। पंजाब के एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कुछ लोग RTI को पारदर्शिता का माध्यम नहीं, बल्कि ‘बिजनेस मॉडल’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। अदालत ने ऐसे ही एक मामले में दो RTI कार्यकर्ताओं को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
यह मामला पंजाब के गुरदासपुर जिले में चल रहे सड़क निर्माण कार्य से जुड़ा है। आरोप है कि RTI कार्यकर्ता रमेश बहल और राजीव कुमार ने निर्माण कार्य में बाधा डाली, अधिकारियों और मजदूरों के साथ मारपीट की तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने पूछा, “सड़क निर्माण की निगरानी करने का अधिकार आपको किसने दिया? क्या आप इंजीनियर हैं, अधिकारी हैं या जनता के अधिकृत प्रतिनिधि?”
कोर्ट ने कहा कि RTI का मकसद सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना है, न कि सरकारी कर्मचारियों के काम में दखल देकर परियोजनाओं को प्रभावित करना। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कानून की आड़ में सरकारी कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जाता है, तो ऐसे लोगों को राहत नहीं दी जा सकती।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने PIL (जनहित याचिका) के बढ़ते दुरुपयोग पर भी चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि कई याचिकाएं अब जनहित से ज्यादा निजी हित, प्रचार और राजनीति का माध्यम बनती जा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है RTI और PIL लोकतंत्र के मजबूत हथियार हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल जवाबदेही के लिए होना चाहिए, न कि दबाव, प्रचार या निजी हित साधने के लिए।
