संवाददाता : Azam lala
कानून का असली इम्तिहान सिर्फ़ अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में नहीं, बल्कि आम आदमी के दिल में भरोसा पैदा करने में होता है। जब किसी शहर का पुलिस मुखिया अपने दफ्तर की चारदीवारी से निकलकर सीधे अवाम के बीच पहुंचे, उनकी बातें सुने और उनके तजुर्बात जाने, तो यह महज़ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि पुलिस और जनता के रिश्ते को मजबूत करने की कोशिश बन जाता है।
इसी सिलसिले में भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने नूरमहल थाना कोतवाली क्षेत्र में नागरिकों के साथ जनसंवाद किया। इस दौरान क्षेत्रवासियों ने थाना प्रभारी और पुलिस स्टाफ द्वारा कायम की गई कानून व्यवस्था की सराहना की। सबसे अहम बात यह रही कि आम नागरिकों ने पुलिस व्यवस्था पर संतोष जताया और किसी बड़ी शिकायत का मुद्दा सामने नहीं आया।
पिछले कुछ समय से भोपाल में एक साथ दो तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। एक तरफ अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई, धरपकड़ और सख्ती का दौर जारी है, तो दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन यह भी जानने की कोशिश कर रहा है कि जनता का पुलिस पर भरोसा कितना मजबूत है।
दरअसल किसी भी इलाके का थाना सिर्फ़ अपराध दर्ज करने की जगह नहीं होता, बल्कि वह आम लोगों की उम्मीदों का केंद्र भी होता है। जब कोई पीड़ित अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचता है तो उसके दिल में एक यक़ीन होता है कि यहां उसकी बात सुनी जाएगी और उसे इंसाफ मिलेगा।
भोपाल पुलिस कमिश्नर का यह जनसंवाद उसी भरोसे की नब्ज़ टटोलने की कोशिश माना जा रहा है। वह सिर्फ़ अपराध के आंकड़े नहीं देख रहे, बल्कि यह भी समझना चाह रहे हैं कि पुलिस और जनता के बीच का रिश्ता कितना मजबूत हुआ है।
शहर के कई थाना क्षेत्रों में अपराधियों के खिलाफ तेज़ कार्रवाई के परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। जिन इलाकों में कभी बदमाशों का खौफ चर्चा का विषय था, वहां अब पुलिस की सक्रियता चर्चा में है। यही वजह है कि जिन थानों ने अपराध नियंत्रण में बेहतर काम किया है, उन्हें भी कमिश्नर द्वारा खुलकर सराहा जा रहा है।
वर्दी का रुतबा तब मुकम्मल होता है जब उसे देखकर अवाम के दिल में डर नहीं, बल्कि एतमाद पैदा हो। भोपाल में बदलती पुलिसिंग का अंदाज़ यही संदेश देता दिखाई दे रहा है कि कानून सिर्फ़ किताबों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर भी दिखाई देना चाहिए।
जब पुलिस अपराधियों के खिलाफ सख्त हो और आम नागरिकों के लिए आसान, तब शहर की फिज़ा बदलती है। शायद यही वजह है कि आज कई लोगों की ज़ुबान पर एक ही बात सुनाई देने लगी है—
“इंसाफ अब रसूख और दौलत का मोहताज नहीं होना चाहिए, कानून की चौखट पर हर शख्स बराबर है।”
और शायद इसी भरोसे को मजबूत करने के लिए भोपाल पुलिस का यह जनसंवाद शहर की बदलती तस्वीर का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
