मुरैना। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियाल संरक्षण अभियान के तहत एक बार फिर महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। देवरी घड़ियाल संरक्षण केंद्र की हैचरी में संरक्षित किए गए अंडों से 54 स्वस्थ घड़ियाल शावकों का सफल जन्म हुआ है, जिससे केंद्र में कुल शावकों की संख्या बढ़कर 153 हो गई है।
जानकारी के अनुसार, ये अंडे चंबल नदी के बाबू सिंह घेर क्षेत्र से वैज्ञानिक पद्धति से एकत्र किए गए थे और उन्हें सुरक्षित वातावरण में देवरी केंद्र की हैचरी में रखा गया था। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अंडों से शावकों का सुरक्षित रूप से बाहर निकलना संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

क्वॉरेंटाइन में रखे गए नवजात शावक :
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जन्म के बाद सभी शावकों को विशेष निगरानी में रखा गया है। उन्हें फिलहाल क्वॉरेंटाइन में रखा गया है, जहां उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और विकास पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रारंभिक चरण में किसी भी प्रकार के संक्रमण या जोखिम से बचाने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाती है।

संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण में अहम कदम :
विशेषज्ञों के अनुसार घड़ियाल दुनिया की सबसे संकटग्रस्त मगरमच्छ प्रजातियों में शामिल हैं। चंबल नदी को इनके प्रमुख प्राकृतिक आवासों में से एक माना जाता है। ऐसे में यहां चल रहे संरक्षण कार्यक्रम घड़ियालों की घटती आबादी को स्थिर करने और बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार, नियंत्रित वातावरण में अंडों की सुरक्षा और शावकों के शुरुआती जीवन की देखभाल से उनकी जीवित रहने की दर काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि चंबल क्षेत्र में संचालित हैचरी कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से सफल साबित हो रहे हैं।

जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत :
54 नए घड़ियाल शावकों का जन्म केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि चंबल नदी के पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नदी की जैव विविधता मजबूत होगी और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भविष्य की योजना :
वन विभाग के अनुसार, इन शावकों को कुछ समय तक सुरक्षित वातावरण में पालन-पोषण के बाद धीरे-धीरे प्राकृतिक नदी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। इससे चंबल में घड़ियालों की आबादी बढ़ाने और उनके प्राकृतिक आवास को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे संरक्षण प्रयासों के कारण चंबल में घड़ियाल संरक्षण मॉडल अब देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बनता जा रहा है।

