न्यूज़ बाय : रज़ा लाला ख़ान
चीन के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित हार्बिन शहर ने 31 मई 2026 को मौसम का एक बेहद भयावह रूप देखा, जब एक शक्तिशाली धूल भरी आंधी और तेज़ तूफानी हवाओं ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया। हेइलोंगजियांग प्रांत की राजधानी हार्बिन में आई इस भीषण आंधी के कारण दिन के समय भी अंधेरे जैसी स्थिति पैदा हो गई। शहर के कई हिस्सों में आसमान भूरे धूल भरे बादलों से ढक गया, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में सामने आए वीडियो में देखा गया कि धूल के विशाल गुबार ऊंची इमारतों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को पूरी तरह ढंक रहे थे। तेज हवाओं के साथ उड़ती धूल ने दृश्यता को बेहद कम कर दिया। कई क्षेत्रों में विज़िबिलिटी 100 मीटर से भी नीचे पहुंच गई, जिसके कारण लोगों को आवागमन और दैनिक गतिविधियों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़क पर चल रहे वाहन धीमी गति से चलते दिखाई दिए, जबकि कई लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने में ही भलाई समझी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह इस वर्ष पूर्वोत्तर चीन में आए सबसे शक्तिशाली धूल भरे तूफानों में से एक माना जा रहा है। तेज हवाओं के कारण जगह-जगह पेड़ों की शाखाएं टूटकर गिर गईं और निर्माण स्थलों व खुले इलाकों से उड़कर आया मलबा सड़कों पर बिखर गया। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और कई स्थानों पर दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया।
इस प्राकृतिक आपदा का असर हवाई यातायात पर भी देखने को मिला। खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ उड़ानों के संचालन पर भी असर पड़ा। वहीं राजमार्गों पर वाहनों की रफ्तार कम करनी पड़ी, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।
रिपोर्टों के अनुसार इस तूफान के दौरान कुछ लोगों के घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं, हालांकि प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत और आपातकालीन सेवाओं को सतर्क रखा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
तूफान गुजरने के बाद भी हार्बिन के निवासियों को धूल, प्रदूषण और खराब वायु गुणवत्ता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों ने श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम संबंधी घटनाएं दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लगातार चुनौती बनती जा रही हैं। ऐसे हालात में समय पर चेतावनी प्रणाली, आपदा प्रबंधन और नागरिकों की जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।
