न्यूज़ बाय : रज़ा लाला ख़ान
तालिबान सरकार ने भारतीय कंपनी के साथ ₹387 करोड़ की ट्रेड-लैब डील की, सीमा चौकियों पर बनेगा हाईटेक क्वालिटी नेटवर्क अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने देश की व्यापारिक और कस्टम व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय कंपनी TCRC (Total Cargo Inspection and Research Central) के साथ लगभग 46.3 मिलियन डॉलर (करीब ₹387 करोड़) का समझौता किया है।
यह समझौता अफगानिस्तान की सीमा चौकियों पर आने-जाने वाले माल की जांच प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप तैयार करने के लिए किया गया है। इस परियोजना के तहत काबुल समेत अफगानिस्तान की 9 अहम बॉर्डर क्रॉसिंग्स पर अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन हाईटेक लैब्स में निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेक्सटाइल, चमड़ा और कागज उत्पादों की गुणवत्ता की जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर की जाएगी।
इसका मकसद बाजार में घटिया और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की एंट्री रोकना और व्यापारिक सुरक्षा को मजबूत बनाना है। पांच साल की अवधि वाले इस अनुबंध में भारतीय कंपनी आधुनिक मशीनों की सप्लाई, इंस्टॉलेशन और पुरानी लैब व्यवस्थाओं के अपग्रेड का काम करेगी। साथ ही अफगान नेशनल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (ANSA) के तकनीकी कर्मचारियों को भारतीय विशेषज्ञ ट्रेनिंग भी देंगे, ताकि अफगान प्रयोगशालाएं ISO जैसे वैश्विक मानकों की मान्यता प्राप्त कर सकें। समझौते के हस्ताक्षर समारोह में तालिबान प्रशासन के आर्थिक मामलों के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर की मौजूदगी ने इस डील को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया।
यह समझौता ऐसे दौर में सामने आया है जब पाकिस्तान सीमा पर लगातार तनाव, व्यापारिक रुकावटें और बॉर्डर बंद होने जैसी समस्याएं अफगान अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही हैं। ऐसे माहौल में भारत की एक निजी कंपनी के साथ इतनी बड़ी तकनीकी साझेदारी यह संकेत देती है कि औपचारिक कूटनीतिक मान्यता न होने के बावजूद भारत और अफगानिस्तान के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग धीरे-धीरे गहराता जा रहा है।
