उत्तर प्रदेश के मेरठ में बेटी के तलाक के बाद जिस तरह एक परिवार अपनी बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते हुए घर वापस लाया वो खबर सोशल मीडिया पर छाई हुई है. हर कोई प्रणिता के पिता रिटायर्ड डॉ ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा और पूरे परिवार की तारीफें कर रहे हैं. वहीं इसे लेकर एबीपी न्यूज़ ने भी प्रणिता ओर उनके परिवार से बात की है.
तलाक लेकर अपने घर आने वाली प्रणिता ने कहा कि “मेरी शादी को सात साल हो गए, मैं काफी समय से परेशान चल रही थी और ससुरालवालों के साथ एडजस्ट कर रही थी लेकिन, कुछ ठीक नहीं हुआ.” प्रणिता ने कहा कि मेरे माता-पिता बहुत सपोर्टिव हैं. मैं चाहती हूं कि सोसाइटी में माता-पिता को भी ऐसा ही होना चाहिए कि वो आपको समझे.
तलाक के बाद ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत
प्रणिता ने बताया कि जब उनका परिवार ढोल नगाड़ों के साथ उन्हें लेने पहुंचा तो उन्हें इसके बारे में जानकारी भी नहीं थी. उन्होंने कहा कि मैं तो यहीं कहती हूं कि परिवार को समर्थन करना चाहिए, बिना उनके समर्थन के ऐसा नहीं होता. मुझे अच्छा लग रहा है मेरे माता-पिता मुझे बोझ नहीं समझते. मुझे नहीं पता था कि मेरा ऐसा स्वागत होगा. तलाक के बाद जब बाहर आई तो सबने जैसे स्वागत किया उससे बहुत खुशी हुई, थोड़ा रोना भी आ रहा था लेकिन अच्छा लगा.
बेटी की वापसी पर क्या बोले पिता
प्रणिता के पिता डॉ ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने कहा “क्या तलाक के बाद बेटी का अस्तित्व खत्म हो गया और अगर अस्तित्व खत्म नहीं हुआ तो तलाक तो एक प्रक्रिया है कि अगर दो बच्चे साथ ख़ुश नहीं रह पा रहे तो ऐसी प्रक्रिया अपनाओं जिससे जीवन में प्रसन्नता आए. तलाक उस खुशी को वापस लाने का तरीका है. उसमें किस बात का दुख, उसकी खुशी मनानी चाहिए.”
उन्होंने कहा कि मेरी बेटी एक आत्मा है, ये कोई वस्तु थोड़ी है कि उसे अलग कर दो, जैसे गाजे-बाजे के साथ विदा किया था वैसे ही तलाक़ के बाद मैं अपनी बच्ची का वापस ले आया हूं. मैंने अपनी बेटी को देखा, मैंने संपत्ति पर घ्यान नहीं दिया. हमने ससुराल वालों से कोई खर्चा या मुआवजा भी नहीं मांगा. बस मुझे मेरी बेटी दे दो.
‘बहू को बेटी की तरह मानना चाहिए’
प्रणिता की मां माधवी ने भी बेटी का अपने घर में पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया. मां ने कहा कि “शादी के बाद से ही हमारी बेटी परेशान रहने लगी थी. एक साल बाद से ही वो अलग होना चाहती थी. हमारे समझाने पर बेटी ने एडजस्ट करने की कोशिश की लेकिन फिर भी वो नहीं बदले.
अगर कोई प्रताड़ना है तो वो बेटी को है. ये सब नहीं चलता, आपको बेटी को स्वीकार करना चाहिए. उसे बेटी की तरह मानो. लोगों को अपनी बेटी की खुशियां माननी चाहिए.”