कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा के बयान को हिमाचल प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का समर्थन मिला है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर आनंद शर्मा ने केंद्र सरकार के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की थी, जिस पर अब राज्य सरकार के मंत्री ने भी सहमति जताई है.
रोहित ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आनंद शर्मा कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, जो हमेशा तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखते हैं. उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा ने यह बयान किसी राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए दिया है.
शिक्षा मंत्री ने साफ कहा कि यह किसी एक सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इस समय पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने की उम्मीद कर रही है. उन्होंने बताया कि इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है और इसका सीधा नुकसान विकासशील देशों को झेलना पड़ रहा है.
घटती एनरोलमेंट पर सरकार की चिंता
रोहित ठाकुर ने प्रदेश में घटते एनरोलमेंट को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने बताया कि साल 2002 में पहली से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में करीब 9 लाख 70 हजार छात्र थे, जो अब घटकर करीब 4 लाख 2 हजार रह गए हैं.
इस गिरावट को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पहले चरण में 151 सरकारी स्कूलों को CBSE से एफिलिएट करने की योजना बनाई गई है. इसका मकसद सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को बेहतर बनाना है.
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इन स्कूलों में पहली कक्षा से ही अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई शुरू की जाएगी. साथ ही छात्रों के लिए स्मार्ट ड्रेस जैसी नई पहल भी लागू की जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूल निजी स्कूलों के मुकाबले बेहतर विकल्प बनें, ताकि अभिभावक फिर से इनकी ओर रुख करें.
ट्रांसफर पॉलिसी पर भी दिया संकेत
रोहित ठाकुर ने कहा कि फिलहाल शिक्षा विभाग में ट्रांसफर पर रोक जारी है. हालांकि वह व्यक्तिगत रूप से ट्रांसफर पॉलिसी के पक्ष में हैं, लेकिन इसे लागू करने के लिए सभी की सहमति जरूरी है.
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर विधानसभा में विपक्ष से भी चर्चा की गई है. देश के कई राज्यों में ट्रांसफर पॉलिसी लागू है, ऐसे में हिमाचल प्रदेश में भी इसे लागू करने की जरूरत है.