राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने शनिवार को पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष और दरार की अटकलों को पूरी तरह से खारिज किया. पार्टी ने कहा कि एनसीपी प्रमुख अजित पवार के निधन के बाद निर्वाचन आयोग के साथ शीर्ष नेताओं के संवाद को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है.
एनसीपी ने उन आरोपों का भी खंडन किया, जिनमें वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पर पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था. साथ ही उन अटकलों को भी निराधार बताया गया कि वर्तमान पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार दोनों नेताओं से नाराज हैं.
‘प्रफुल्ल पटेल को अधिकार’
एनसीपी प्रवक्ता सूरज चौहान ने बताया कि अजित पवार के समय में भी प्रफुल्ल पटेल के पास कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पार्टी उम्मीदवारों को ‘एबी’ फॉर्म आवंटित करने का अधिकार था. प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे द्वारा 16 फरवरी को निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र के अनुसार, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यकारी अध्यक्ष को महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार है.
इसके बाद सुनेत्रा पवार ने 10 मार्च को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपने निर्वाचन और कार्यसमिति की नियुक्ति की जानकारी दी और स्पष्ट किया कि पूर्व में भेजा गया पत्र अमान्य माना जाए.
निराधार हैं ऐसी अटकलें- एनसीपी
एनसीपी प्रवक्ता ने कहा, “अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद कार्यकारी अध्यक्ष के पास मौजूद शक्तियां स्वतः समाप्त हो जाती हैं. इसलिए, पार्टी में सत्ता संघर्ष और आंतरिक कलह की अटकलें जानबूझकर फैलाई गई हैं, जो पूरी तरह निराधार और झूठी हैं.”
इसलिए तेज हुईं अटकलें
निर्वाचन आयोग को लिखे गए चार पन्नों के पत्र में सुनेत्रा पवार ने बिना पदनाम के सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल का उल्लेख किया, जिससे संगठन में उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर अटकलें तेज हुईं. महाराष्ट्र में एनसीपी, बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ सत्ता में साझेदार है.
विमान हादसे में गई थी अजित पवार की जान
गौरतलब है कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती में विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी. उनके निधन के बाद सुनेत्रा पवार को 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई और 26 फरवरी को उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष चुना गया.