अब हंसी भी बीमारी का संकेत बन सकती है, लेकिन अच्छी बात यह है कि अब इसका इलाज भी भारत में उपलब्ध है. दरअसल, जोधपुर के एम्स अस्पताल में डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारी ‘लाफिंग एपिलेप्सी’ (हंसने वाली मिर्गी) के चार मरीजों का सफल इलाज किया. आइए इसके बारे में जानते हैं.
क्या है यह बीमारी?
यह बीमारी ऐसी है, जिसमें मरीज को बिना किसी वजह बार-बार हंसी के दौरे पड़ते हैं. यह सामान्य हंसी नहीं होती. यह मिर्गी का एक खास प्रकार है, जो दवाओं से कंट्रोल नहीं होता. सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन यह मरीज के लिए बहुत परेशानी भरा होता है.
क्या है लाफिंग एपिलेप्सी?
लाफिंग एपिलेप्सी को गेलास्टिक सीजर्स भी कहते हैं. इसमें मरीज अचानक हंसने लगता है, जैसे कोई मजाक सुन लिया हो. असल में यह दिमाग के किसी खास हिस्से से शुरू होने वाले दौरे होते हैं. कई बार हंसी के साथ अन्य लक्षण भी दिखते हैं, जैसे शरीर में अकड़न या बेहोशी. अगर समय पर सही इलाज न हो तो यह समस्या बढ़ सकती है. इस बीमारी के मरीजों को आमतौर पर दवाओं से आराम नहीं मिलता है. ऐसे में सर्जरी की जरूरत पड़ती है. जोधपुर एम्स के डॉक्टरों ने ऐसे ही चार मरीजों की सर्जरी नई तकनीक से की.
कैसे की गई मरीजों की सर्जरी?
डॉक्टरों ने मिनिमली इनवेसिव स्टीरियोटैक्टिक रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें दिमाग के उस छोटे से हिस्से को टारगेट किया जाता है, जहां से दौरे शुरू होते हैं. यह सर्जरी बड़े चीरे के बिना की गई. सिर्फ छोटे से चीरे से काम चलाया गया. इससे मरीज को कम दर्द होता है और जल्दी रिकवर भी हो जाता है.
इन डॉक्टरों ने की सफल सर्जरी
इस सर्जरी के लिए न्यूरोलॉजी विभाग से डॉ. सम्हिता पांडा और डॉ. लोकेश सैनी ने मरीजों की जांच की. वहीं, डॉ. सरबेश तिवारी ने एमआरआई से सही जगह का पता लगाया. एनेस्थीसिया की टीम में डॉ. स्वाति छाबड़ा और डॉ. मनबीर कौर शामिल थीं तो डॉ. मोहित अग्रवाल ने सर्जरी की. वहीं, डॉ. दीपक के झा और डॉ. सूर्यनारायणन भास्कर भी इसमें शामिल रहे.
एम्स जोधपुर का मिर्गी सर्जरी कार्यक्रम
एम्स जोधपुर में साल 2019 से मिर्गी की सर्जरी का कार्यक्रम चल रहा है. अब तक यहां 100 से ज्यादा ऐसी सर्जरी हो चुकी हैं. इनमें कई मरीज ऐसे थे, जिन पर दवाएं काम नहीं कर रही थीं. इन सर्जरी में कई मरीजों का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त में किया गया.
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