कोतवाली नगर क्षेत्र के बल्ला हाता स्थित परमेश्वरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान जच्चा (प्रसूता) और बच्चा (नवजात) दोनों की दर्दनाक मौत के बाद हड़कंप मच गया है. घटना के बाद भारी हंगामे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और सीएमओ (CMO) कार्यालय की टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया.
इस जांच में अस्पताल की घोर लापरवाही और गंभीर खामियां उजागर हुई हैं. वहीं, मौके पर पहुंचे एडिशनल सीएमओ के एक बयान ने इस मामले में नया विवाद खड़ा कर दिया है.
एडिशनल CMO का गैर-जिम्मेदाराना बयान
मामले की जांच करने पहुंचे एडिशनल सीएमओ (ACMO) आशुतोष श्रीवास्तव ने घंटों तक अस्पताल का निरीक्षण किया. इस दौरान जब अस्पताल में एंबुलेंस पहुंचने के रास्ते तक की व्यवस्था नहीं होने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया. ACMO ने कहा, “स्वास्थ्य विभाग केवल अस्पताल को लाइसेंस देता है. अस्पताल तक पहुंचने के रास्ते और एंबुलेंस की व्यवस्था करना विभाग की जिम्मेदारी नहीं है.” इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
जांच में सामने आईं ये गंभीर खामियां:
- अस्पताल के निरीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं:
- दस्तावेजों का अभाव: अस्पताल किसी भी मरीज के बेसिक ट्रीटमेंट (इलाज) से जुड़ी जानकारी या फाइल टीम को नहीं दिखा सका.
- डॉक्टरों पर सवाल: जांच के दौरान एनेस्थीसिया देने वाले और अन्य डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी जरूरी दस्तावेज नदारद मिले.
- अव्यवस्थाओं का अंबार: अस्पताल में बुनियादी स्वास्थ्य मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ती पाई गईं.
पिछले साल भी सील हो चुका है अस्पताल
हैरानी की बात यह है कि परमेश्वरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल विवादों के लिए नया नहीं है. अनियमितताओं के चलते इस अस्पताल को पिछले साल भी सील किया जा चुका है. इसके बावजूद यह फिर से कैसे संचालित हो रहा था, यह जांच का विषय है.
FIR और लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी
एडिशनल सीएमओ आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि जच्चा-बच्चा की मौत के मामले की सघन जांच की जा रही है. अगर जांच में अस्पताल संचालक और डॉक्टर दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी. इसके साथ ही अस्पताल के मानक पूरे न होने पर उसका लाइसेंस रद्द कर उसे दोबारा सील करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी.
जिला अस्पताल में दलालों की सक्रियता स्वीकारी
जांच के दौरान एडिशनल सीएमओ ने इस बात को भी खुले तौर पर स्वीकार किया कि सरकारी जिला अस्पताल में प्राइवेट अस्पतालों के दलालों की सक्रियता की शिकायतें मिली हैं. मरीजों को बरगला कर प्राइवेट अस्पतालों में ले जाने वाले इस रैकेट की भी जल्द जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी.