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मतभेद खत्म! मोहित कंबोज की पार्टी में पहुंचे आदित्य ठाकरे, निकाले जा रहे कई सियासी मायने

महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इस समय मोहित कंबोज और आदित्य ठाकरे की मुलाकात चर्चा का विषय बनी हुई है. शनिवार (28 मार्च) को बीजेपी नेता और बिजनेसमैन मोहित कंबोज ने अपनी बेटी के जन्मदिन के मौके पर एक पार्टी का आयोजन किया था. इस कार्यक्रम में कई राजनीतिक नेता, सेलिब्रिटी और उद्योगपति शामिल हुए. लेकिन खास बात यह रही कि आदित्य ठाकरे भी इस कार्यक्रम में उनके निवास पर पहुंचे, जिस पर कई लोगों ने हैरानी जताई.

महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान मोहित कंबोज ने कई आरोप लगाए थे और उस समय ठाकरे गुट की शिवसेना और कंबोज के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला था. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह राजनीतिक विवाद खत्म हो गया है?

आदित्य ठाकरे की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय

कुछ साल पहले तक दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और ‘मातोश्री’ के बाहर हुए विवाद को लोग भूले नहीं हैं. ऐसे में आदित्य ठाकरे का इस जन्मदिन समारोह में शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है. शिवसेना में टूट के दौरान भी मोहित कंबोज को शिंदे गुट के साथ देखा गया था. अब इतने विवादों के बाद आदित्य ठाकरे का इस कार्यक्रम में जाना कई संकेत दे रहा है.

कार्यक्रम में कई बड़े नेता और सेलिब्रिटी रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में सिर्फ आदित्य ठाकरे ही नहीं, बल्कि मिलिंद नार्वेकर भी मौजूद थे. इसके अलावा राज ठाकरे, सीएम देवेंद्र फडणवीस, आशीष शेलार, अमित साटम, सुप्रिया सुले, श्रीकांत शिंदे जैसे नेता भी शामिल हुए. साथ ही रितेश देशमुख, संजय दत्त, शाहरुख खान और अनंत अंबानी जैसे सेलिब्रिटी भी उपस्थित थे. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा आदित्य ठाकरे की मौजूदगी को लेकर ही हुई.

क्या खत्म हुआ ठाकरे-कंबोज विवाद?

आदित्य ठाकरे की इस मौजूदगी के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों के बीच का विवाद खत्म हो गया है? या फिर शिंदे गुट और बीजेपी के बीच संभावित मतभेदों के बीच ठाकरे गुट भाजपा नेताओं के करीब आने की कोशिश कर रहा है?

हालांकि, ठाकरे गुट की ओर से कहा जा रहा है कि यह एक व्यक्तिगत मुलाकात थी और इसमें राजनीति नहीं देखनी चाहिए. फिर भी, इस घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मोहित कंबोज के साथ राजनीतिक दुश्मनी खत्म हो गई है या भाजपा के साथ ठाकरे गुट की नजदीकियां बढ़ रही हैं. यह बात साबित होती दिख रही है कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है.

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