दिल्ली के मशहूर कमर्शियल हब नेहरू प्लेस में फेरी-पटरी लगाने वालों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने साफ कहा है कि नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट कमर्शियल परिसर पहले से ही नो-वेंडिंग और नो-हॉकिंग जोन घोषित है, इसलिए यहां किसी भी तरह की अनधिकृत रेहड़ी-पटरी की इजाजत नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने दो वेंडरों की याचिका खारिज करते हुए दिल्ली नगर निगम को तुरंत कार्रवाई करने और इलाके से सभी अवैध वेंडरों को हटाने का निर्देश दिया.
दिल्ली हाई कोर्ट में वेंडरों ने दाखिल की थी याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट में दो वेंडरों ने याचिका दाखिल कर मांग की थी कि उन्हें नेहरू प्लेस के मानसरोवर बिल्डिंग के सामने अपनी दुकान लगाने से न रोका जाए. उनका कहना था कि वे साल 2000 की शुरुआत से यहां रेहड़ी लगाकर काम कर रहे हैं और उन्हें स्ट्रीट वेंडर्स जीविका संरक्षण और सड़क विक्रय विनियमन अधिनियम 2014 के तहत संरक्षण मिलना चाहिए. लेकिन कोर्ट ने कहा कि पहले भी कई बार इस मामले पर सुनवाई हो चुकी है और हर बार यह साफ किया गया है कि नेहरू प्लेस में वेंडिंग की अनुमति नहीं है.
याचिकाकर्ता का नाम आधिकारिक लिस्ट में शामिल नहीं- HC
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के नाम उन आधिकारिक सूची में शामिल नहीं हैं, जिनमें मान्यता प्राप्त वेंडरों के नाम दर्ज हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता पहले भी इसी तरह की मांग लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली. इसके बावजूद बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना उचित नहीं है. इसी वजह से कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.
हाई कोर्ट ने MCD को क्या निर्देश दिया?
सुनवाई के दौरान जब वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता अभी भी नेहरू प्लेस में वेंडिंग कर रहे हैं. तो कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई. अदालत ने कहा कि यह पहले दिए गए आदेशों के बिल्कुल खिलाफ है. कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि तुरंत कार्रवाई कर यह सुनिश्चित किया जाए कि नेहरू प्लेस इलाके में कोई भी अनधिकृत वेंडर कारोबार न कर सके. मामले की अगली सुनवाई अनुपालन रिपोर्ट के लिए 21 मई को तय की गई है.