ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की हत्या के करीब एक महीने बाद, कश्मीर घाटी के विभिन्न शिया और सुन्नी धार्मिक संगठनों के नेताओं ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा किया. कश्मीरी नेताओं ने दिवंगत नेता को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस मुश्किल दौर में ईरान और कश्मीर के लोगों के बीच मौजूद सदियों पुराने और गहरे सांस्कृतिक संबंधों को याद किया.
मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व में MMU की अहम मुलाकात
शुक्रवार (27 मार्च) को मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फ़तहाली और दूतावास के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से विशेष मुलाकात की. इस महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई MMU के संरक्षक मीरवाइज़ उमर फारूक कर रहे थे. उनके साथ घाटी के कई अन्य प्रमुख धार्मिक विद्वान भी मौजूद थे, जिनमें मुफ़्ती नासिर-उल-इस्लाम, आगा सैयद हसन अल-मोसवी और आगा सैयद हादी अल-मोसवी मुख्य रूप से शामिल थे.
ईरान के साथ कश्मीर की एकजुटता और शोक संवेदना
दूतावास में मुलाका के दौरान, कश्मीरी प्रतिनिधिमंडल ने अयातुल्ला अली ख़ामेनेई, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य ईरानी नेताओं की हत्या पर गहरा दुख और संवेदना व्यक्त की. नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस घटना और ख़ामेनेई की मौत से कश्मीर की जनता को गहरा सदमा पहुंचा है. कश्मीर की अवाम की ओर से बोलते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा संकट, मुश्किलों और आक्रमण के इस बेहद कठिन दौर में ईरान के नागरिकों और सरकार के प्रति अपनी गहरी एकजुटता और समर्थन ज़ाहिर किया.
इज़राइल-अमेरिका के युद्ध की निंदा और शांति की अपील
दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के अलावा, MMU प्रतिनिधिमंडल ने मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी हिंसक संघर्ष पर भी अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की. कश्मीरी नेताओं ने इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर थोपे गए मौजूदा युद्ध और आक्रामकता की कड़ी निंदा की. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों से हस्तक्षेप की मांग करते हुए यह उम्मीद जताई कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए किए जा रहे सभी कूटनीतिक प्रयास जल्द ही सफल होंगे, ताकि इस विनाशकारी युद्ध पर जल्द से जल्द विराम लग सके.