उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार (27 मार्च) को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब एक मरीज के इलाज और ऑपरेशन में देरी से नाराज एक महिला तीसरी मंजिल पर जाकर आत्महत्या करने की कोशिश करने लगी. महिला दीवार पर चढ़ चुकी थी, लेकिन समय रहते सुरक्षा कर्मियों को इसकी सूचना मिल गई और वे तुरंत मौके पर पहुंचे. उन्होंने किसी तरह महिला को पकड़कर सुरक्षित नीचे उतारा और घटना की जानकारी 112 पुलिस को दी. हालांकि, काफी देर तक इंतजार करने के बाद महिला अपने घर वापस चली गई.
कई बार ऑपरेशन की तारीख दी, मगर ऑपरेशन नहीं किया
मामला महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज का है, जहां एक मरीज यूरोलॉजी की समस्या के चलते कई दिनों से भर्ती था. उसकी देखभाल उसकी दो बेटियां कर रही थीं. बेटियों का आरोप है कि डॉक्टरों ने कई बार ऑपरेशन की तारीख दी, मरीज को ऑपरेशन थिएटर तक ले जाया गया, लेकिन फिर बिना ऑपरेशन किए वापस भेज दिया जाता था.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर बाहर की महंगी दवाएं लिखते थे, जिन्हें वे खरीदकर लाती थीं, लेकिन उन दवाओं का इस्तेमाल उनके पिता के इलाज में नहीं किया गया. उनका कहना है कि एक बार तो वही दवा किसी अन्य मरीज को दे दी गई और बाद में गलती मानते हुए पैसे लौटाने की बात कही गई, लेकिन पैसे भी वापस नहीं किए गए.
महिला ने नाराज होकर आत्महत्या की बात कही
बताया गया कि एक दिन पहले ऑपरेशन न होने से नाराज होकर महिला अपने पिता को घर ले गई थी. शुक्रवार को वह फिर मेडिकल कॉलेज पहुंची और किसी बात से नाराज होकर ऊपर की मंजिल पर चली गई, जहां उसने आत्महत्या की बात कही. इसकी सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मी तुरंत ऊपर पहुंचे और उसे सुरक्षित नीचे ले आए. इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस भी कुछ देर में मौके पर पहुंची और महिला व उसकी बहन को कोतवाली ले जाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों इसके लिए तैयार नहीं हुईं.
रामनवमी की छुट्टी के बाद भी ऑपरेशन का दिया आश्वासन
घटना की जानकारी मिलने पर उप-प्रधानाचार्य डॉ. नीरज पांडे भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने दोनों महिलाओं को समझाया और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर से बात कर रामनवमी की छुट्टी के बावजूद शुक्रवार को हर हाल में ऑपरेशन कराने का आश्वासन दिया. वहीं, डॉ. नीरज पांडे ने बताया कि मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के दौरान उसका पल्स रेट कम हो गया था, जिसके कारण एनेस्थीसिया देना संभव नहीं था और ऑपरेशन टालना पड़ा.
उन्होंने कहा कि मरीज को 2D जांच कराने के लिए कहा गया था, लेकिन परिजन यह जांच नहीं करा रहे थे. साथ ही, कंसेंट फॉर्म पर हस्ताक्षर भी नहीं किए गए थे, जिसके चलते ऑपरेशन नहीं हो पाया. महिलाओं द्वारा लगाए गए दवा से संबंधित आरोपों को उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया.