उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही नए कैबिनेट मंत्री खजान दास के सामने कई बड़ी और गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. यह विभाग अपने साथ कुछ पुराने और गहरे दाग लेकर चलता है, जिनमें करोड़ों का बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाला और डबल पेंशन वितरण जैसी धांधलियां प्रमुख हैं. पदभार ग्रहण करते ही नए मंत्री के सामने पहले दिन से सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे इस विभाग की धूमिल छवि सुधारकर उस गरीब तक उसका हक पहुंचा पाएंगे, जिसके लिए यह विभाग बना है?
‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं’
राजनीति में अक्सर देखा गया है कि नए मंत्री पद संभालते ही महीनों तक ‘समीक्षा’ के नाम पर टालमटोल करते हैं या गड़बड़ियों का ठीकरा पूर्ववर्ती सरकारों पर फोड़ते हैं. लेकिन खजान दास ने एक अलग रुख अपनाया है. एबीपी (ABP) न्यूज़ से विशेष बातचीत में जब घोटाले और गड़बड़ियों के सवाल रखे गए, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं सबसे पहले सभी अधिकारियों से विस्तृत फीडबैक लूंगा और जमीनी हकीकत को समझूंगा. यह विभाग सीधे गरीब और आम आदमी से जुड़ा है, इसलिए यहां किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”
छात्रवृत्ति घोटाले और सिस्टम का चक्रव्यूह
खजान दास के पास लंबा राजनीतिक अनुभव, मजबूत जनाधार और अपनी बात को बेबाकी से रखने का शानदार अंदाज है. लेकिन समाज कल्याण एक ऐसा विभाग है, जहां गरीब का पैसा अक्सर लाभार्थी तक पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में गायब हो जाता है. ऐसे में सिर्फ इरादों से काम नहीं चलेगा, उन्हें धरातल पर उतारना एक बड़ी चुनौती होगी. छात्रवृत्ति घोटाले की धूल फांकती फाइलें, डबल पेंशन के पेंडिंग मामले और नौकरशाही का पुराना ढर्रा— ये सब नए मंत्री का कड़ा इम्तिहान लेने के लिए तैयार बैठे हैं.
अब शुरू होगी असली परीक्षा
अब देखना दिलचस्प होगा कि खजान दास का विशाल सियासी अनुभव क्या सरकारी दफ्तरों की उलझी हुई फाइलों और सिस्टम के भ्रष्ट मकड़जाल को सुलझाने में भी कारगर साबित होगा? गरीबों का हक उन तक पहुंचाना उनके राजनीतिक करियर की सबसे कठिन और असली परीक्षा होगी.