गैरसैण में बीते विधानसभा सत्र के दौरान भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की जो रिपोर्ट सामने आई. उसने उत्तराखंड के परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट में जो तथ्य उजागर हुए हैं, वे न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की दास्तान कहते हैं बल्कि आम यात्रियों की जान से जुड़े सवाल भी उठाते हैं.
CAG रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि राज्य में 67,603 वाहन बिना वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़कों पर धड़ल्ले से चल रहे हैं. इनमें 561 एंबुलेंस और 34 स्कूली बसें भी शामिल हैं. यानी वो वाहन जिन पर बच्चों और मरीजों की जिंदगी निर्भर होती है. फिटनेस सर्टिफिकेट महज एक कागज नहीं है, यह इस बात की गारंटी होती है कि वाहन तकनीकी रूप से सुरक्षित है और सड़क पर चलने के लिए उपयुक्त है. जब यह प्रमाण पत्र ही नहीं है, तो वाहन की स्थिति क्या होगी यह सोचना भी असहज करता है, खासकर तब जब उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कें पहले से ही चुनौतीपूर्ण हैं.
पंजीकरण से लेकर राजस्व तक हर मोर्चे पर चूक
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 43,821 गैर-परिवहन वाहनों के पंजीकरण का नवीनीकरण अभी तक लंबित पड़ा है. इसके अलावा 2,362 वाहन ऐसे हैं जिनका अस्थायी पंजीकरण छह महीने से अधिक समय बाद भी स्थायी नहीं हो पाया. राजस्व के मोर्चे पर भी विभाग की फिसड्डी कार्यप्रणाली सामने आई. 361 निर्माण उपकरण वाहनों को सही श्रेणी में दर्ज करने की बजाय ‘अन्य’ में डाल दिया गया, जिससे सरकार को पंजीकरण शुल्क में सीधा नुकसान उठाना पड़ा. यह कोई तकनीकी भूल नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की बुनियादी विफलता है.
धामी मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बत्रा के हाथ में कमान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच हाल ही में हुए धामी मंत्रिमंडल विस्तार में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी मंत्री प्रदीप बत्रा को सौंपी गई है. नई जिम्मेदारी संभालते ही उनके सामने CAG की इस रिपोर्ट का बोझ भी आ गया है. मंत्री बत्रा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जल्द ही इस पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने विशेष रूप से चार धाम यात्रा का हवाला देते हुए आश्वासन दिया कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी वाहनों की फिटनेस जांच करा दी जाएगी.
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चार धाम यात्रा से पहले की परीक्षा
मंत्री का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि चार धाम यात्रा की शुरुआत जल्द होने जा रही है और इस दौरान उत्तराखंड की सड़कों पर वाहनों का अभूतपूर्व दबाव रहता है. लाखों श्रद्धालु हर साल इन रास्तों से गुजरते हैं और उनकी सुरक्षा काफी हद तक इन्हीं वाहनों पर निर्भर करती है. ऐसे में अगर फिटनेस जांच महज खानापूर्ति बनकर रह गई, तो CAG की रिपोर्ट के बाद भी हालात नहीं बदलेंगे. अब देखना यह है कि मंत्री बत्रा का यह भरोसा जमीन पर उतरता है या फिर यह भी विधानसभा की फाइलों में दबकर रह जाता है.
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