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Walking Speed And Health: आप भी चलते हैं धीमें तो समझ लीजिए आपका दिल दे रहा यह खतरनाक संकेत, तुरंत हो जाएं अलर्ट

How Walking Speed Reflects Heart Health: आप कितनी तेजी से चलते हैं, यह सिर्फ आपकी आदत नहीं, बल्कि आपकी सेहत का एक अहम संकेत भी हो सकता है. आमतौर पर लोग दिल की सेहत को ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल से जोड़कर देखते हैं, लेकिन अब डॉक्टर एक आसान चीज पर भी ध्यान दे रहे हैं कि आपकी चलने की स्पीड.  सुनने में भले साधारण लगे, लेकिन यह बताती है कि हार्ट, लंग्स, मांसपेशियां और ब्रेन कितनी अच्छी तरह साथ काम कर रहे हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. सुनील राणा ने TOI को बताया कि वॉकिंग स्पीड को अब एक तरह का “वाइटल साइन” माना जाने लगा है, जैसे पल्स या ब्लड प्रेशर. अगर कोई व्यक्ति लगातार धीमी गति से चलता है, तो यह कमजोर दिल, कम मसल स्ट्रेंथ या शरीर में किसी शुरुआती समस्या का संकेत हो सकता है. क्योंकि चलने के दौरान शरीर के कई सिस्टम एक साथ काम करते हैं जैसे कि ऑक्सीजन की सप्लाई, मांसपेशियों की ताकत और नर्वस सिस्टम का तालमेल. 

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स्पीड कम होना क्यों है खतरनाक?

अगर आपकी चलने की रफ्तार पहले के मुकाबले कम हो गई है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर पहले जितनी कुशलता से काम नहीं कर रहा. कई रिसर्च भी बताती हैं कि जिन लोगों की वॉकिंग स्पीड धीमी होती है, उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है. यह सिर्फ दिल की बात नहीं है. चलने की स्पीड से मांसपेशियों और जोड़ों की स्थिति का भी अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर शरीर में दर्द, जकड़न या कमजोरी है, तो व्यक्ति अनजाने में धीमा चलने लगता है. खासकर ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियां भी चलने की गति को प्रभावित कर सकती हैं.

कैसे कर सकते हैं पता?

अच्छी बात यह है कि आप घर पर ही अपनी वॉकिंग स्पीड को जांच सकते हैं. इसके लिए 4-6 मीटर की दूरी नापें और सामान्य रफ्तार से चलें. फिर देखें कि इसे तय करने में कितना समय लगता है. आमतौर पर स्वस्थ व्यक्ति की स्पीड 1 से 1.4 मीटर प्रति सेकंड होती है. एक आसान तरीका यह भी है कि चलते समय आप आराम से बातचीत कर पा रहे हैं या नहीं. अगर नहीं, तो यह हार्ट और फेफड़ों पर दबाव का संकेत हो सकता है. अगर आपको अपनी स्पीड बेहतर करनी है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है. रोज थोड़ा तेज चलने की कोशिश करें, हफ्ते में कुछ दिन हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें और अपनी बॉडी पोस्चर पर ध्यान दें. धीरे-धीरे यह सुधार आपकी फिटनेस में भी दिखेगा.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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