भोपाल, 23 मार्च।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पेट्रोलियम आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के वितरण पर सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब गैस सिलेंडर का आवंटन तय प्राथमिकता और प्रतिशत सीमा के अनुसार किया जाएगा। इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य व्यवसायों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार ने यह व्यवस्था लागू की है, ताकि आवश्यक सेवाओं में गैस की कमी न हो। राजधानी होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष तेलकुलपाल सिंह पाली ने शासन की इस पहल का स्वागत किया है।
किसे कितनी गैस मिलेगी, तय हुआ पूरा फॉर्मूला
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार कमर्शियल एलपीजी का वितरण पांच प्रमुख श्रेणियों में किया गया है:
- शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थान को उनकी आवश्यकता का 100% तक गैस दी जाएगी, जो कुल आवंटन का लगभग 30% होगा।
- आवश्यक सेवाएं जैसे पुलिस, सुरक्षा बल, जेल, महिला एवं बाल विकास संस्थान, रेलवे, एयरपोर्ट और दीनदयाल रसोई को 35% हिस्सा मिलेगा।
- होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड विक्रेता को सीमित गैस दी जाएगी — होटल और रेस्टोरेंट को 9-9%, जबकि ढाबा और फूड वेंडर्स को 7%।
- फार्मास्यूटिकल और फूड प्रोसेसिंग उद्योग को 5% आवंटन मिलेगा।
- अन्य उद्योगों और मामलों में प्रकरणवार निर्णय के आधार पर 5% तक गैस दी जाएगी।
यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार ने जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक उपयोग पर अंकुश लगाया है।

औसत खपत के आधार पर तय होगी सप्लाई
नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि किसी भी उपभोक्ता को गैस उसकी पिछले तीन महीनों की औसत खपत के आधार पर ही दी जाएगी। यानी अब मनमाने तरीके से सिलेंडर बुकिंग या अतिरिक्त स्टॉक करना संभव नहीं होगा।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम के जरिए बुकिंग और सप्लाई का पूरा रिकॉर्ड रखेंगी। लंबित मांगों को उपलब्धता के अनुसार अगले दिन पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस सिलेंडरों की जमाखोरी, अवैध भंडारण, कम तौल और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
जरूरत पड़ने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। पिछले वर्षों में भी गैस संकट के दौरान कई जिलों में कालाबाजारी के मामले सामने आए थे, जहां सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे थे।
होटल और छोटे कारोबारियों पर असर
इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर पड़ सकता है। सीमित गैस आवंटन के कारण:
- उत्पादन लागत बढ़ सकती है
- खाने-पीने की कीमतों में वृद्धि संभव है
- छोटे व्यापारियों को संचालन में कठिनाई हो सकती है
भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में पहले भी गैस की कमी के दौरान कई छोटे ढाबों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था।
वैकल्पिक ऊर्जा अपनाने पर जोर
सरकार ने ऐसे क्षेत्रों में जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (PNG) उपलब्ध है, वहां व्यावसायिक उपभोक्ताओं को PNG कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया है।
साथ ही संस्थानों को अस्थायी रूप से इलेक्ट्रिक या अन्य वैकल्पिक कुकिंग सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लंबे समय में ऊर्जा विविधीकरण को बढ़ावा देगा और गैस पर निर्भरता कम करेगा।
पहले भी दिख चुका है ऐसा संकट
यह पहली बार नहीं है जब गैस वितरण को नियंत्रित करना पड़ा हो।
- कोविड-19 के दौरान ऑक्सीजन और गैस सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया था।
- 2012-13 में LPG सब्सिडी संकट के दौरान भी सिलेंडर वितरण सीमित किया गया था।
इन अनुभवों के आधार पर सरकार इस बार पहले से अधिक व्यवस्थित और डिजिटल तरीके से नियंत्रण लागू कर रही है।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह कदम “संकट प्रबंधन” की दृष्टि से जरूरी है, लेकिन लंबे समय में इसके आर्थिक प्रभाव भी सामने आएंगे। खासकर खाद्य उद्योग और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को इससे झटका लग सकता है।
क्या आगे भी बढ़ सकती है सख्ती?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था “अगले आदेश तक” लागू रहेगी। यानी यदि अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो और सख्त नियम भी लागू किए जा सकते हैं।