Skip to content

Uttarakhand News: गंगोत्री धाम में गैर-सनातनियों पर प्रवेश पर सख्ती, पंचगव्य पान के बाद ही कर पाएंगे दर्शन

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ गंगोत्री धाम को लेकर मंदिर समिति ने एक अहम निर्णय लिया है. समिति के अनुसार अब गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा, हालांकि विशेष शर्त के साथ उन्हें दर्शन की अनुमति दी जा सकती है. यह शर्त पंचगव्य के पान से जुड़ी है.

गैर-सनातनी दर्शन करने से पहले करें पंचगव्य का पान

मंदिर समिति का कहना है कि यदि कोई गैर-सनातनी श्रद्धालु गंगोत्री धाम में दर्शन करना चाहता है, तो उसे पहले पंचगव्य का पान करना होगा. इसके बाद ही उसे मंदिर में प्रवेश और पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाएगी. यह निर्णय गंगोत्री मंदिर समिति द्वारा लिया गया है, जो हाल के दिनों में धार्मिक स्थलों पर प्रवेश को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सामने आया है.

इससे पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा भी गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था. वहां यह व्यवस्था बनाई गई थी कि यदि कोई गैर-सनातनी केदारनाथ धाम या बद्रीनाथ धाम में दर्शन करना चाहता है, तो उसे शपथ पत्र (एफिडेविट) के माध्यम से सनातन धर्म में आस्था जतानी होगी. गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव और चार धाम महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि गंगोत्री धाम में सामान्य रूप से गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक रहेगी, लेकिन जो लोग सच्ची श्रद्धा के साथ पंचगव्य का सेवन करेंगे और गंगाजल से स्नान करेंगे, उन्हें मंदिर में प्रवेश दिया जा सकता है.

शुद्धिकरण प्रक्रिया में 8 से 10 सदस्यों की समिति गठित

उन्होंने बताया कि पंचगव्य पांच तत्वों—गंगाजल, गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी से मिलकर तैयार किया जाता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से शुद्धिकरण का माध्यम माना जाता है. मंदिर समिति के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद व्यक्ति को शुद्ध मानते हुए दर्शन की अनुमति दी जाएगी.

सुरेश सेमवाल ने यह भी जानकारी दी कि मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार पर समिति के सदस्य मौजूद रहेंगे, जो इस प्रक्रिया को सुनिश्चित करेंगे. साथ ही, इस व्यवस्था के लिए 8 से 10 सदस्यों की एक समिति गठित की गई है, जिसमें कानूनी जानकारी रखने वाले लोग भी शामिल हैं, ताकि किसी की धार्मिक स्वतंत्रता या अधिकारों का उल्लंघन न हो. इस निर्णय के बाद धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा आस्था और संवैधानिक अधिकारों दोनों से जुड़ा हुआ है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *