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Gorakhpur News: गो-आधारित खेती से कृषि लागत घटाने पर योगी सरकार का जोर, जैविक उपज की बढ़ रही मांग

जन स्वास्थ्य की रक्षा के साथ मिट्टी की सेहत को मजबूत रखते हुए कृषि लागत कम करने के लिए योगी सरकार गो-आधारित खेती को अभियान का रूप दे रही है. परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत गोरखपुर में 20 क्लस्टर बनाकर 400 हेक्टेयर यानी करीब 900 एकड़ में जैविक खेती की शुरुआत हो चुकी है. सरकार इन किसानों को तीन वर्ष तक प्रोत्साहन अनुदान भी दे रही है. खेती की लागत कम होने का सीधा अर्थ है किसानों की आय में वृद्धि.

 ब्रह्मपुर और सरदारनगर ब्लॉक में 20 क्लस्टर, 419 किसान जुड़े

गोरखपुर के दो विकास खंडों ब्रह्मपुर और सरदारनगर में कुल 20 क्लस्टर बनाए गए हैं. ब्रह्मपुर ब्लॉक में 10 क्लस्टर बनाकर 216 किसानों को और सरदारनगर ब्लॉक में 10 क्लस्टर से 203 किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया गया है. इस तरह कुल 419 किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं. इन सभी किसानों को तीन वर्ष तक सरकार की तरफ से प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा.

 पहले साल 4800, दूसरे साल 4000 और तीसरे साल 3600 रुपये प्रति एकड़ अनुदान

गोरखपुर में कृषि विभाग के उप निदेशक धनंजय सिंह ने बताया कि परंपरागत कृषि योजना में क्लस्टर से जुड़कर जैविक खेती करने वालों को पहले वर्ष 4800 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा. दूसरे वर्ष यह राशि 4000 रुपये प्रति एकड़ और तीसरे वर्ष 3600 रुपये प्रति एकड़ होगी. इसके साथ ही किसानों को प्रशिक्षण, जैविक बीज, बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, हरी खाद, लिक्विड बायो फर्टिलाइजर, वेस्ट डीकम्पोजर और प्राकृतिक कीटनाशक उपलब्ध कराने में भी सहायता दी जाती है.

 प्रति एकड़ 10-12 हजार रुपये लागत में कमी – आकिब जावेद

ब्रह्मपुर ब्लॉक में आकिब जावेद फार्मर प्रोड्यूसर्स कंपनी के संचालक आकिब जावेद बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जीवामृत, घनजीवामृत और वर्मीकम्पोस्ट जैसे जैविक विकल्पों को अपनाकर किसान प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये तक की बचत कर रहे हैं. यह सीधे तौर पर किसानों के मुनाफे में इजाफा करता है.

 कैंसर-मधुमेह के बढ़ते प्रकोप से जैविक उत्पादों की मांग में तेजी

कैंसर, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप तथा कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी वैश्विक जागरूकता के चलते बाजार में टॉक्सिन फ्री जैविक उपज की मांग तेजी से बढ़ी है. इससे जैविक खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है. उप निदेशक धनंजय सिंह कहते हैं कि गो-आधारित खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि मिट्टी की पोषकता और जन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह बेहद महत्वपूर्ण है.

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