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छात्रों की सेहत पर फोकस, UGC ने कॉलेज-यूनिवर्सिटी के लिए नई गाइडलाइन जारी की

देश के लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है. यूजीसी ने एक नई पहल करते हुए कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों की मेंटल हेल्थ, फिटनेस और ओवरऑल वेलबीइंग को लेकर अहम गाइडलाइंस जारी की हैं.अब सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों की मानसिक स्थिति, तनाव और जीवनशैली पर भी खास ध्यान दिया जाएगा.

क्या है गाइडलाइंस का मकसद

यूजीसी का मानना है कि उच्च शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. यह छात्रों के जीवन को बेहतर बनाने और उन्हें समाज के लिए तैयार करने का जरिया है. ऐसे में संस्थानों की जिम्मेदारी बनती है कि वे छात्रों को एक सुरक्षित, सकारात्मक और सपोर्टिव माहौल दें, जहां वे बिना डर और दबाव के आगे बढ़ सकें.

छात्रों की समस्याओं पर फोकस

नई गाइडलाइंस में खासतौर पर उन समस्याओं को ध्यान में रखा गया है जिनसे आज के छात्र जूझ रहे हैं. पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता, दोस्तों का दबाव , तनाव, डिप्रेशन और व्यवहार से जुड़ी दिक्कतें आज आम हो गई हैं. यूजीसी ने संस्थानों से कहा है कि वे इन समस्याओं को गंभीरता से लें और समय रहते समाधान निकालें.

कैंपस लाइफ को बेहतर बनाने पर जोर

यूजीसी ने यह भी कहा है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी का माहौल सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं होना चाहिए  कैंपस में ऐसी गतिविधियां होनी चाहिए जो छात्रों के शैक्षणिक, सामाजिक और व्यक्तिगत विकास में मदद करें.इसके लिए इंटर्नशिप, ग्रुप एक्टिविटी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक कार्यों को बढ़ावा देने की बात कही गई है.

 मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम होगा मजबूत

गाइडलाइंस के अनुसार हर संस्थान में स्टूडेंट सर्विस सेंटर (SSC) बनाया जाना चाहिए. यह एक ऐसा सेंटर होगा जहां छात्रों को काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद और अन्य समस्याओं का समाधान मिल सकेगा. यहां प्रशिक्षित एक्सपर्ट्स मौजूद रहेंगे, जो छात्रों की बात सुनेंगे और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन देंगे.

यूजीसी ने साफ कहा है कि छात्रों की शारीरिक फिटनेस भी उतनी ही जरूरी है जितनी पढ़ाई. इसलिए कॉलेजों को खेल के मैदान, जिम, योग और फिटनेस प्रोग्राम जैसी सुविधाएं देनी होंगी.  जहां छात्रों को नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रह सकें.

सख्ती की जगह समझ और सहयोग

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि छात्रों के साथ बहुत ज्यादा सख्ती या सजा देने से बचा जाए. अगर किसी छात्र में व्यवहार से जुड़ी समस्या है, तो उसे सजा देने के बजाय काउंसलिंग और सुधार के जरिए मदद की जाए. इससे छात्र खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे और खुलकर अपनी बात रख पाएंगे.

मेडिकल संस्थानों से सहयोग बढ़ेगा

यूजीसी ने यह भी सुझाव दिया है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर काम करें. इससे जरूरत पड़ने पर छात्रों को बेहतर इलाज और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेगी.साथ ही भविष्य के लिए ज्यादा से ज्यादा मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स तैयार करने पर भी जोर दिया गया है.

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