उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. पार्टी ने चार बड़े शहरों-गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और मेरठ-में रैलियों के जरिए चुनावी अभियान की शुरुआत करने का ऐलान किया है.
इस अभियान का औपचारिक आगाज 22 मार्च 2026 को गोरखपुर से होगा, जहां महंत दिग्विजयनाथ पार्क में पहली विशाल रैली आयोजित की जाएगी. पार्टी इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं व समर्थकों की भागीदारी की तैयारी की जा रही है.
रैलियों के केंद्र में मझवार और तुरैहा समाज को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी. इसके साथ ही खनन, घाट और जमीन से जुड़े पारंपरिक अधिकारों की बहाली का मुद्दा भी पार्टी के एजेंडे में शामिल है. मछुआ समाज के अधिकारों को लेकर व्यापक आंदोलन छेड़ने की तैयारी भी की जा रही है.
संगठनात्मक स्तर पर भी निषाद पार्टी सक्रिय नजर आ रही है. पार्टी ने 88 जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति कर संगठन को मजबूत करने का दावा किया है.
संजय निषाद ने किया ये ऐलान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पार्टी प्रमुख संजय निषाद ने 16 मार्च को पोस्ट करते हुए 22 मार्च को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित निषाद राज जयंती और प्रांतीय अधिवेशन के अवसर पर मछुआ एससी आरक्षण विशाल महारैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की. उन्होंने इसे समाज के हक, सम्मान और अधिकारों की मजबूती का अवसर बताया.
इसके बाद 17 मार्च को किए गए एक अन्य पोस्ट में संजय निषाद ने लिखा कि निषाद समाज की आवाज और बुलंद हो रही है और उनके नेतृत्व में समाज अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने एससी आरक्षण को अपना अधिकार बताते हुए इसे हासिल करने की बात दोहराई.
माना जा रहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद से रैलियों की औपचारिक शुरुआत के जरिए एक ओर जहां संजय, बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं तो वहीं निषाद समाज से जुड़े मुद्दे उठाकर वह गठबंधन में अपनी धमक जताते हुए कुछ अहम सीटों पर दावा ठोंक सकते हैं.