Skip to content

Uttarakhand: वाइब्रेंट विलेज योजना में 402 करोड़ के प्रस्तावों को हरी झंडी, सीमांत गांवों में बनेंगे अस्पताल

उत्तराखंड के सीमांत गांवों की तस्वीर बदलने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोजेक्ट की स्टेट लेवल स्क्रीनिंग कमेटी यानी SLSC की बैठक हुई जिसमें सीमांत क्षेत्रों के चयनित गांवों के लिए लगभग 402 करोड़ रुपये के नए विकास प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई. इन प्रस्तावों में बुनियादी जरूरतों से लेकर आधुनिक सुविधाओं तक का खयाल रखा गया है.

 अस्पताल से लेकर स्मार्ट क्लासरूम तक – क्या-क्या मिलेगा सीमांत गांवों को

मंजूर हुए प्रस्तावों की फेहरिस्त काफी लंबी है. गांवों में पर्यटन हाउसिंग और ग्राम अवसंरचना के विकास के साथ-साथ सड़क संपर्क को मजबूत किया जाएगा ताकि दूर-दराज के इलाके मुख्यधारा से जुड़ सकें. स्वास्थ्य के मोर्चे पर अस्पताल बनाए जाएंगे. युवाओं को ध्यान में रखते हुए खेल मैदान और स्मॉल जिम सेंटर भी तैयार होंगे. बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जाएंगे. अंधेरे में डूबी गलियों को सोलर स्ट्रीट लाइट से रोशन किया जाएगा और कृषि उत्थान से जुड़े काम भी इस योजना का हिस्सा हैं.

 पलायन रोकना सबसे बड़ा लक्ष्य – होमस्टे और पर्यटन से मिलेगा रोजगार

सीमांत गांवों से पलायन उत्तराखंड की एक बड़ी और पुरानी समस्या रही है. रोजगार न होने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग पहाड़ छोड़कर मैदानों की ओर रुख करते रहे हैं. इन विकास कार्यों के जरिए सरकार की कोशिश है कि सीमांत क्षेत्रों में आजीविका के नए रास्ते खुलें और स्थानीय लोगों को अपनी जमीन पर ही रोजगार मिले. पर्यटन हाउसिंग जैसे प्रस्ताव इसी सोच का हिस्सा हैं. अगर सीमांत गांव पर्यटकों को आकर्षित करने लगें तो होमस्टे, गाइड और स्थानीय उत्पादों की बिक्री से गांव वालों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है.

 महज आंकड़ों की पूर्ति नहीं, वास्तविक बदलाव की नजीर बनें ये गांव

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने साफ कहा कि इन कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होगा. उनका जोर इस बात पर था कि विकास कार्य इतने स्तरीय हों कि ये गांव दूसरे क्षेत्रों के लिए भी मिसाल बन जाएं – महज आंकड़ों की पूर्ति नहीं बल्कि वास्तविक बदलाव की नजीर. उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे योजनाओं से होने वाले असल फायदे, लोगों की आजीविका में बदलाव और दीर्घकालिक प्रभाव का स्पष्ट ब्यौरा साझा करें.

यानी सरकार अब सिर्फ काम करवाने तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि यह भी जानना चाहती है कि उन कामों से जमीन पर क्या बदला.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *