अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के घरों तक पहुंच गया है. खाड़ी देशों से भारत आने वाली तमाम हवाई उड़ानें रद्द हो गई हैं और जो फ्लाइटें चल रही हैं उनका किराया करीब 10 गुना तक महंगा हो गया है. इसकी वजह से बड़ी संख्या में भारतीय ईद के त्योहार पर भी अपने घर नहीं आ पा रहे. भारत में रहने वाले परिजनों की ईद न सिर्फ फीकी होगी बल्कि उन्हें खाड़ी देशों में फंसे अपनों की लगातार फिक्र भी सता रही है.
ऐसे ही परेशान परिवारों में पिंक सिटी जयपुर का फारूकी परिवार भी है. पुराने जयपुर शहर में ईदगाह के पीछे बदनपुरा इलाके में रहने वाले वसीम फारूकी और रमीज फारूकी के पिता रशीद और छोटे भाई नदीम दुबई में नौकरी करते हैं. दोनों हर साल ईद से करीब दस दिन पहले जयपुर आते थे. इस बार भी टिकट बुक थी लेकिन युद्ध के हालात की वजह से वह कैंसिल हो चुकी है. जो फ्लाइटें उड़ान भर रही हैं उनका किराया करीब 10 गुना बढ़ चुका है.
‘कभी-कभी मिसाइल हमले की आती है खबर’
आम दिनों में वसीम और रमीज हर पांच-सात दिनों में पिता और भाई से बात कर लेते थे लेकिन जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से वह रोजाना पांच से सात बार उनसे बात करते हैं. कई बार दुबई से खबर मिलती है कि जहां पिता और भाई ठहरे हुए हैं उससे कुछ दूर ही मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ है. पूरा परिवार गम और फिक्र में डूबा रहता है.
‘धूमधाम से ईद मनाने का था प्लान’
फारूकी परिवार ने इस बार धूमधाम से ईद मनाने का फैसला किया था. परिवार में कुछ खास फंक्शन भी होने थे लेकिन युद्ध ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. दुबई पर लगातार हमलों के बाद से ईद की तैयारियां रोक दी गई हैं. परिवार ने अब सिर्फ सादगी के साथ नमाज पढ़ने का फैसला किया है. न जश्न मनाया जाएगा और न ही कोई नया कपड़ा पहनने को तैयार है.
छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक सभी दुबई में फंसे पिता और भाई की सलामती की दुआ कर रहे हैं. परिवार के छोटे बच्चों का साफ कहना है कि वे दादा और चाचा के बिना ईद का त्योहार नहीं मनाएंगे.
PM मोदी से गुहार – सरकारी खर्च पर लाएं खाड़ी देशों में फंसे भारतियों को वापस
फारूकी ब्रदर्स और उनके बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि PM मोदी ने पहले भी कई मौकों पर विदेश में फंसे भारतीयों को सरकारी खर्च पर देश लाने का काम किया है. उसी तरह दुबई और दूसरे खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को भी सरकारी खर्च पर भारत लाने के इंतजाम किए जाएं. यह कहानी अकेले फारूकी परिवार की नहीं है – जयपुर में सैकड़ों ऐसे परिवार हैं जिनके घर का कोई सदस्य युद्ध प्रभावित देशों में फंसा है और ईद पर भी वापस नहीं आ पा रहा.
पूरा परिवार दुआ कर रहा है कि युद्ध जल्द खत्म हो और हालात सामान्य हों ताकि वे अपनों से मिल सकें.