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पौड़ी: घटिया सड़क निर्माण पर URRDA का एक्शन, तीन इंजीनियरों और ठेकेदार पर 1.71 करोड़ की वसूली का आदेश

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता को लेकर उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (यूआरआरडीए) ने अब सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है. पौड़ी जिले के पाबौ ब्लॉक में बनी पटौटी-कालों मार्ग पर हुए घटिया निर्माण मामले में यूआरआरडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने ठेकेदार और तीन अभियंताओं पर कुल 1 करोड़ 71 लाख 76 हजार 289 रुपये की वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं.

पीएमजीएसवाई के सिंचाई खंड श्रीनगर-एक के अंतर्गत पाबौ ब्लॉक में करीब चार किलोमीटर लंबे पटौटी-कालों मार्ग को स्वीकृति मिली थी. इस सड़क पर दो चरणों में काम हुआ — पहले चरण में भूमि कटान और दूसरे चरण में डामरीकरण. दोनों चरणों में मिलाकर कुल 1.71 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि खर्च की गई.

गुणवत्ता जांच टीम ने सड़क निर्माण में पाईं कई खामियां

सड़क बनकर तैयार होने के बाद जब राज्य स्तरीय गुणवत्ता जांच टीम ने निरीक्षण किया तो निर्माण में एक नहीं, अनेक गंभीर खामियां सामने आईं. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि ठेकेदार और मौके पर तैनात अभियंताओं ने इन खामियों की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी और न ही सुधार किया. 

रिपोर्ट को दरकिनार कर काम को पूर्ण घोषित किया

हैरानी की बात यह रही कि इंजीनियरों ने रिपोर्ट को दरकिनार कर काम को पूर्ण घोषित कर दिया गया. इसके बाद जब केंद्र सरकार की टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया तो घटिया निर्माण की फिर से पुष्टि हुई और इस बार अभियंताओं की लापरवाही पर सीधे सवाल खड़े किए गए.

क्या कहता है नियम

पीएमजीएसवाई की नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास अभिकरण (एनआरआईडीए) किसी सड़क को जांच के बाद “सुधार योग्य नहीं” की श्रेणी में रखता है, तो उस सड़क पर खर्च हुई संपूर्ण राशि का 50 प्रतिशत ठेकेदार से और शेष 50 प्रतिशत संबंधित अभियंताओं से वसूला जाएगा. पटौटी-कालों मार्ग को भी इसी श्रेणी में रखा गया, जिसके बाद वसूली की यह कार्रवाई अमल में आई.

किस पर कितनी वसूली

यूआरआरडीए के सीईओ आलोक कुमार पांडेय ने ठेकेदार से 85.88 लाख रुपये की वसूली के आदेश पहले ही जारी कर दिए थे. अब अभियंताओं की बारी आई है. शेष 50 प्रतिशत राशि को जिम्मेदारी के अनुपात में बांटते हुए निम्नलिखित आदेश दिए गए हैं, जिसमें कनिष्ठ अभियंता विवेक पुरोहित — 42.94 लाख रुपये (50 प्रतिशत हिस्सेदारी), सहायक अभियंता भगत सिंह रावत — 30.05 लाख रुपये (35 प्रतिशत हिस्सेदारी)

इसके साथ ही अधिशासी अभियंता वीरेंद्र दत्त जोशी (अब सेवानिवृत्त) — 12.88 लाख रुपये (15 प्रतिशत हिस्सेदारी), वसूली सुनिश्चित करने के लिए सीईओ पांडेय ने सिंचाई विभाग के सचिव और विभागाध्यक्ष को अलग से पत्र भेजकर कार्रवाई करने को कहा है. उल्लेखनीय है कि अधिशासी अभियंता वीरेंद्र दत्त जोशी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, बावजूद इसके उनकी जिम्मेदारी तय की गई है और उनसे भी वसूली की जाएगी.

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