मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में रसोई गैस की कमी को देखते हुए कलेक्टर जयति सिंह का दिया सुझाव अब चर्चा में आ गया है. कलेक्टर ने शादियों में रोटी-पराठा न बनाने का सुझाव दिया है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि शादी समारोहों के मेन्यू में ऐसे व्यंजन चुने जाएं जिनमें कम ईंधन की खपत हो. यह सलाह इंडेन गैस की कमी के बीच ईंधन बचत के उद्देश्य से दी गई है.
कलेक्टर जयति सिंह ने कहा कि जिले में रसोई गैस की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सामूहिक कार्यक्रमों में ईंधन का उपयोग सोच-समझकर करना जरूरी है. शादियों में बड़ी मात्रा में खाना पकाया जाता है, जिससे गैस की खपत तेजी से बढ़ती है. ऐसे में लोगों से सहयोग की अपील की गई है ताकि गैस की उपलब्धता सामान्य बनी रहे.
लेकिन ये सुझाव क्यों?
कलेक्टर के सलाह के अनुसार, खाना बनाने में सबसे ज्यादा ईंधन रोटी और पराठा बनाने में लगती है और शादी समारोहों जैसे मौके पर कम ईंधन में बनने वाले व्यंजन चुने जा सकते हैं. इससे गैस की बचत होगी और अभी की स्थिति देखते हुए आपूर्ति पर दबाव कम पड़ेगा. सामूहिक कार्यक्रमों में ईंधन के जिम्मेदार उपयोग की जरूरत है.
वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की सलाह
कलेक्टर ने सुझाव दिया कि शादी समारोहों में खाना पकाने के लिए वैकल्पिक साधनों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इंडक्शन चूल्हे या डीजल भट्टी का उपयोग कर ईंधन की खपत को कम किया जा सकता है. इससे गैस सिलेंडर पर निर्भरता घटेगी और बड़े आयोजनों में खाना बनाने की प्रक्रिया भी सुचारु रूप से चल सकेगी.
ईंधन बचत से गैस किल्लत से निपटने की कोशिश
प्रशासन का मानना है कि अगर बड़े आयोजनों में ईंधन की खपत कम की जाए तो गैस की कमी की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इसी उद्देश्य से लोगों से अपील की गई है कि वे शादी और अन्य कार्यक्रमों में ऐसे मेन्यू चुनें जिनमें कम गैस खर्च हो. इससे जिले में गैस की उपलब्धता बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.