लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला विवाद पर एक अहम सुनवाई आज यानी 16 मार्च को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में होनी है. यह मामला धार जिले में मौजूद एक ऐतिहासिक इमारत से जुड़ा है जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के संरक्षण में है. अदालत ने इससे पहले ASI को निर्देश दिया था कि वह आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करके पूरे परिसर का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण करे.
98 दिन चला सर्वेक्षण, सीलबंद लिफाफे में जमा की गई रिपोर्ट
यह सर्वेक्षण लगभग 98 दिनों तक चला और इसकी अंतिम रिपोर्ट अदालत में एक सीलबंद लिफाफे में जमा की गई. बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार इस रिपोर्ट की प्रतियां मामले से जुड़े सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गईं. इसके बाद हाई कोर्ट ने आज 16 मार्च की तारीख तय की ताकि सभी पक्ष ASI की रिपोर्ट में कही गई बातों पर अपनी आपत्तियां, सुझाव और सिफारिशें दर्ज करा सकें.
मुस्लिम पक्ष ने दर्ज कराई हैं कई अहम आपत्तियां
खबरों के मुताबिक मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण दस्तावेज में बताए गए कई अहम बिंदुओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं. ये आपत्तियां दूसरे पक्षों के साथ भी साझा कर दी गई हैं. आज की सुनवाई में अदालत इन्हीं बिंदुओं की विस्तार से जांच करेगी. इसके अलावा तीन अलग-अलग मुस्लिम संगठनों ने याचिकाएं दायर करके मौजूदा याचिकाओं में खुद को भी एक पक्ष के तौर पर शामिल करने की गुजारिश की है जिन पर भी आज विचार किए जाने की संभावना है.
इस मामले में कई संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है. इनमें हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर मुख्य याचिका भी शामिल है जिसमें इस स्थल के धार्मिक स्वरूप को लेकर घोषणा किए जाने की मांग की गई है. इसके अलावा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी ने भी एक अलग याचिका दायर की है.
हिंदू मानते हैं मां वाग्देवी का मंदिर, मुस्लिम कहते हैं कमाल मौला मस्जिद
यह विवाद उसी स्थल को लेकर है जिसे हिंदू समुदाय मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है. फिलहाल अदालत के पहले के एक आदेश के अनुसार हिंदुओं को मंगलवार के दिन यहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति है जबकि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार को यहां नमाज अदा करता है.
ASI को यह सर्वेक्षण करने का आदेश इसलिए दिया गया था ताकि वह बिना किसी छेड़छाड़ वाली वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करके इस ऐतिहासिक स्मारक से जुड़े ऐतिहासिक और ढांचागत विवरणों का पता लगा सके.
धार में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
उम्मीद है कि ASI की यह रिपोर्ट इस संरक्षित स्मारक में पूजा-अर्चना के अधिकार और इसके संरक्षण से जुड़े भविष्य के पहलुओं पर फैसला लेने में अहम भूमिका निभाएगी. धार के स्थानीय प्रशासन ने आज की अदालती सुनवाई के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम कर लिए हैं. दोनों ही समुदाय आज की सुनवाई पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं क्योंकि इस मामले का जो भी नतीजा निकलेगा उसका असर इस संवेदनशील मुद्दे के समाधान पर पड़ सकता है जो पिछले कई सालों से चला आ रहा है.