मध्य प्रदेश में सरकार की 108 एंबुलेंस सिस्टम नाकामी सामने आई है. इसकी वजह से पांढुर्ना में पुलिस ने गर्भवती महिला की जान बचाई है. वहीं छिंदवाड़ा में एंबुलेंस के देर से पहुंचने पर युवक की जान चली गई है. यह दोनों घटनाएं सरकार पर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं.
मध्य प्रदेश सरकार मातृ-शिशु मृत्युदर को कम करने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है. छिंदवाड़ा और पांढुर्ना क्षेत्र से आई दो खबरें बताती हैं कि सरकारी मशीनरी की लापरवाही और संसाधनों की कमी कैसे आम आदमी के जीवन पर संकट बन रही है.
पांढुर्ना में पुलिस की तत्परता ने बचाई गर्भवती की जान
पांढुर्ना के ग्राम बिछुआकलां में शनिवार (14 मार्च) की रात स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता का मामला सामने आया. नवनीत नारनवरे की सात माह की गर्भवती पत्नी रवीना को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को कॉल किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली.
पत्नी की हालत बिगड़ती देख नवनीत मजबूरन उसे बाइक पर बैठाकर अस्पताल के लिए निकल पड़ा. रास्ते में भंडारगोंदी टी-पॉइंट के पास ड्यूटी पर तैनात एएसआई अशोक तुरिया और प्रधान आरक्षक गजानन मांगुलकर ने जब दर्द से तड़पती महिला को बाइक पर देखा, तो तत्काल सक्रिय हुए. उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी से महिला को अस्पताल पहुंचाया, जिससे उसकी जान बच सकी.
बीएमओ ने मामले पर क्या कहा?
इस अव्यवस्था और एंबुलेंस की कमी पर पांढुर्ना बीएमओ डॉ. दीपेन्द्र सलामे ने स्वीकार किया कि संसाधन सीमित हैं. उन्होंने कहा कि पांढुर्ना और नांदनवाड़ी सिविल अस्पताल के बीच वर्तमान में सिर्फ एक एंबुलेंस संचालित हो रही है, जिससे कई बार ऐसी विषम स्थितियाँ निर्मित हो जाती हैं और मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिल पाती. हम शासन से पत्राचार कर रहे हैं और एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने की मांग की जाएगी ताकि भविष्य में मरीजों को तत्काल आपातकालीन सेवा मिल सके.
छिंदवाड़ा में एंबुलेंस की देरी ने ली युवक की जान
दूसरी ओर छिंदवाड़ा के चोरगांव तिराहे के पास एंबुलेंस की देरी एक परिवार की तबाही का कारण बन गई. थावड़ी कला निवासी 18 वर्षीय राजा वर्मा जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान था, सड़क हादसे का शिकार हो गया. परिजनों का आरोप है कि दुर्घटना के बाद लंबे समय तक 108 एंबुलेंस का इंतजार किया गया, लेकिन वह नहीं पहुंची.
अंततः परिजन निजी वाहन से राजा को जिला अस्पताल लाए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिजनों का बिलख-बिलख कर बुरा हाल है. उनका कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती, तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता.
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