चुनाव आयोग ने रविवार (15 मार्च) को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया है. चुनाव की घोषणा को लेकर कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान पूरी दुनिया में यहां के लोकतंत्र, चुनाव के लिए मशहूर है. चुनाव आयोग की जिम्मेदारी होती है कि निष्पक्ष चुनाव हो और इसके लिए उन्होंने 2 चरणों में पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा की है. पहला फेज 23 अप्रैल को होगा और दूसरा फेज 29 अप्रैल को होगा. यह तारीख और आगे बढ़ाई जा सकती थी. उसका कारण है कि वहां अभी 58 लाख वोटर्स सस्पेंस में हैं या होल्ड पर है.
पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा- मीर
उन्होंने कहा, ”हमेशा यहां का चुनाव एक उत्सव की तरह मनाया जाता है, उसी कड़ी में 5 राज्यों में चुनाव होने हैं. कई दिनों से इसे लेकर चर्चा हो रही थी. असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में एक फेज में चुनाव होंगे. पश्चिम बंगाल के लिए हमारी मांग थी कि यहां भी एक फेज में चुनाव हो. पश्चिम बंगाल में अभी 58 लाख वोटर्स सस्पेंस में है, होल्ड पर है. जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने वहां पर ज्यूडिशयरी के अधिकारी डेप्यूट किए हैं क्योंकि इलेक्शन कमिशन के स्टेट मशीनरी के लोगों ने निष्पक्ष तरीके से वो काम नहीं किया. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को उसमें हस्तक्षेप करना पड़ा.”
#WATCH | अनंतनाग: कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने चुनावी तारीखों की घोषणा पर कहा, “हिंदुस्तान पूरी दुनिया में यहां के लोकतंत्र, चुनाव के लिए मशहूर है… हमेशा यहां का चुनाव एक उत्सव की तरह मनाया जाता है, उसी कड़ी में 5 राज्यों में चुनाव होने हैं। असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी… https://t.co/JzAIYBLU7t pic.twitter.com/Vf24ee3FRJ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 15, 2026
‘बंगाल में कुछ लाख वोट ज्यूडिशयरी से क्लियर होना है’
गुलाम अहमद मीर ने आगे कहा, ”हमारा ये मानना था कि इलेक्शन की घोषणा होने से पहले पश्चिम बंगाल में टोटल वोट कितने हैं, जो योग्य वोटर्स हैं, जो वोट डालने वाले हैं, वो अगर एक आंकड़ा आ जाता और जो वोट देने के लिए योग्य नहीं हैं, उनकी भी क्लियरिटी आ जाती कि वो किस बुनियाद पर योग्य नहीं हैं. अब चुनाव की घोषणा करने के समय तक भी 58 लाख वोटर्स का अभी भविष्य पर प्रश्न चिह्न है. जहां चुनाव आयोग ने बाकी चार स्टेट का स्पष्ट आंकड़ा दिया कि 2 करोड़ या डेढ़ करोड़ वोटर्स वोट करेंगे, वहीं पश्चिम बंगाल को लेकर उन्होंने खुद ही कहा कि वहां पर अभी कुछ लाख वोट है जिनका अभी ज्यूडिशयरी से क्लियर होना है. तो ये एक सस्पेंस चुनाव में जरूर रहेगा.
‘हमारी मांग है कि एक भी वैध मतदाता वोट से वंचित न रहे’
कांग्रेस नेता ये भी कहा कि किसी वजह से किसी वोटर का लिस्ट क्लियर नहीं हुआ तो हमारी डिमांड पहले से ये थी कि एक भी वैध मतदाता पश्चिम बंगाल में मतदान करने से वंचित न रहे. उन्होंने कहा, ”हमारी जानकारी के मुताबिक इतना जल्दी उन्होंने शेड्यूल दिया है कि पहला फेज 23 अप्रैल को होगा तो उस लिहाज से इस हफ्ते के अंदर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. हमारे बहुत सारे लोग तमाम पार्टी के टीएमसी, कांग्रेस के बहुत सारे संभावित उम्मीदवार हैं, जिनका अभी वोटर लिस्ट में नाम क्लियर नहीं हुआ है.”
‘चुनाव आयोग को चाहिए था कि एक डेडलाइन दे’
गुलाम अहमद मीर ने आगे कहा, ”चुनाव आयोग को चाहिए था कि एक डेडलाइन दे, प्राथमिकता दे कि जिन लोगों को नामांकन फॉर्म भरना हो, जो किसी पार्टी से प्रत्याशी बनने वाले हैं, ऐसे लोगों के लिए अधिकारियों को हिदायत जानी चाहिए कि सबसे टॉप प्रायोरिटी पर उनका वोटर लिस्ट क्लियर करो. जिसका बनता है उसका क्लियर करो, जिसका नहीं बनता है उसका कारण बताओ कि वो वैध वोटर्स क्यों नहीं है.
उन्होंने ये भी बताया कि बहुत सारे लोगों ने चार-चार चुनाव लड़े हैं, बहुत सारे लोग सीटिंग विधायक हैं. उसमें कई लोग ऐसे भी हैं जो मौजूदा समय में मंत्री हैं तो ऐसे लोगों का वोटर लिस्ट का काम प्राथमिकता पर करना चाहिए. मीर ने कहा, ”बाकी चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव कराने को लेकर जो भरोसा दिलाया है, वो सुनने में तो अच्छे लगे लेकिन क्या प्रैक्टकली या ग्राउंड लेवल पर भी ये सारे नियम कानून लागू होंगे? क्या मतदाताओं को सुविधाएं मिलेंगी? क्या हम इसे पोलिंग वाले दिन तक देख पाएंगे? ये एक बड़ा सवाल रहेगा.”