देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर त्राहिमाम मचा है तो वहीं धार्मिक स्थल भी अब इससे अछूते नहीं रहे. LPG गैस की किल्लत का असर अब मंदिरों तक पहुंच गया है. इस वजह से मंदिर में बनाए जाने वाले प्रसाद को भी सीमित कर दिया है. नोएडा के इस्कॉन मंदिर में अब प्रसाद के रूप में सिर्फ खिचड़ी और आलू की सब्ज़ी परोसी जा रही है.
खिचड़ी और आलू की सब्जी बनाने में गैस की खपत कम होती है इसलिए जहां रविवार के दिन पनीर की सब्ज़ी, छोले, पूरी, हलवा, गुलाब जामुन बनाया जाता था वो अब घटकर सिर्फ खिचड़ी और आलू की सब्जी के रूप में बचा है.
इस्कॉन में चूल्हे कभी नहीं रहते थे खाली- सेवादार
मंदिर के सेवादार रोहिणी दुलाल दास (Rohini Dulal Das) ने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में कहा, ”ये समस्या बड़ी यूनिक है. हम सब LPG पर निर्भर हैं. इस्कॉन में यह चूल्हे कभी खाली नहीं रहते थे. एक दिन में तीन हजार भक्तों का पेट भरते हैं. यहां 6-7 आइटम्स होते थे. गैस की समस्या है इसलिए सीमित करना पड़ा है.
पाइपलाइन गैस को भी लिमिट कर दिया गया- सेवादार
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, ”हमारे पास पाइपलाइन गैस है लेकिन इसमें भी लिमिट कर दिया गया है. हमें 80 फीसदी खपत कम करने के लिए बोला गया है. 20 फीसदी से काम चलाना पड़ रहा है. हम सरकार की गाइडलाइन फॉलो कर रहे हैं. गैस पाइपललाइन का कनेक्शन भी कम कर रहे हैं. पहले हम पूरी-सब्ज़ी, चावल, छोले, पनीर, हलवा बनाते थे, अब ये सब हटा दिया है. अब मीठा खाने वालों के लिए कोई ऑप्शन नहीं है. सिर्फ नमकीन प्रसाद ही है.”
‘हमें दुख है कि भक्तों की उतनी सेवा नहीं कर पा रहे’
उन्होंने आगे कहा, ”रविवार वाले दिन तो सुबह 5 बजे से कुकिंग शुरू होती थी जो रात के 11 बजे तक चलती रहती थी. ये चूल्हे कभी खाली नहीं रहते थे. ऐसा पहली बार हो रहा है. खाना बनाने वाले एक अन्य सेवादार ने कहा, ”हम चावल-कड़ी बनाते थे, गुलाब जामुन या खीर भी बनाते थे. गैस की किल्लत के कारण दो चीजें ही हैं. ऐसा सालों में पहली बार हुआ है.” सेवादार सुदामा दास ने कहा, ”हमें दुख है कि भक्तों को उतना नहीं दे पा रहे जितना देना चाहिए. हम आधा टाइम फ्री हैं लेकिन खुश नहीं हैं. हमें सेवा में ही खुशी मिलती है.”