ईद में चंद दिन बचे हुए हैं. सेवईं का बाजार पूरी तरह से शबाब पर है. नखास, शाह मारूफ, जाफरा बाजार , जाहिदा बाद, घंटाघर जैसे व्यापारिक क्षेत्रों में खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है. बाजार में सेवईंयों की अनगिनत वैरायटी मौजूद है. तिरंगा सेवई अपनी खूबसूरती के कारण बाजार का आकर्षण बनी हुई है.
बाजार में मोटी, बारीक, लच्छेदार के साथ कई वैरायटी की सेवईं मौजूद हैं, जो क्वॉलिटी और अपने नाम के मुताबिक डिमांड में हैं. बनारसी सेवईं अपनी शुद्धता, बारीक बनावट और खास सोंधेपन के लिए मशहूर है.
खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ी भीड़
इस वक्त रेती, शाहमारुफ, घंटाघर, जाफरा बाजार, गीता प्रेस रोड, गोलघर, जाहिदा बाद, गोरखनाथ आदि बाजारों में मुस्लिम महिलाओं को खरीदारी करते आसानी से देखा जा सकता है. ईद के लिए जमकर खरीदारी हो रही है. शाह मारुफ में ईद के लिए सजा दस दिनों वाला अस्थायी बाजार गुलजार है. शनिवार को 24वां रोजा खैर के साथ बीता. बड़े तो बड़े बच्चे भी रोजा रखकर इबादत में मसरूफ हैं.
गैस किल्लत के बावजूद शाम को दस्तरख्वान पर तमाम तरह के खाने रोजेदारों का इस्तकबाल करते नजर आ रहे हैं. हदीस शरीफ के मुताबिक रोजेदार के लिए दरिया की मछलियां भी दुआ करती हैं. सहरी व इफ्तार के समय नूरानी समां चारों तरफ नजर आ रहा है.
सेवईं सेंटर के दुकानदार ने क्या बताया?
उर्दू बाजार स्थित ताज सेवईं सेंटर के आरिफ व कैस ने बताया कि उनके यहां छड़, सादी, छत्ते वाली, किमामी, बनारसी, भुनी, लाल लच्छा, सफेद लच्छा, बनारसी लच्छा, सूतफेनी, रूमाली, दूध फेनी सेवईं बिक रही है. ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा में सेवईं की जमकर बिक्री होती है. इस वक्त सबसे ज्यादा डिमांड में बनारसी किमामी सेवईं है, जोकि हाथों-हाथ खरीदी जा रही है.
माह-ए-रमजान में की गई इबादत व नेकी का सवाब कई गुना बढ़ कर मिलता है, इसीलिए अल्लाह के बंदे रोजा, नमाज, जकात, सदका-ए-फित्र, एतिकाफ आदि के जरिए खूब नेकी बटोर रहे हैं. वहीं रोजेदारों द्वारा शबे कद्र की ताक रातों में जागकर खूब इबादत की जा रही है. कुरआन-ए-पाक की तिलावत मस्जिद व घरों में जारी है.
पुरुषों की तरह औरतें इबादत के साथ किचन व बाजार की जिम्मेदारी निभा रही हैं. भाईचारगी बढ़ाने के लिए सामूहिक इफ्तार की दावतें हर जगह आम हैं. फर्नीचर उद्योग व्यापार मंडल की ओर से बैंक रोड पर सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन हुआ. जिसमें गंगा जमुनी तहजीब देखने को मिली. बड़गो में जुबैर खान के नेतृत्व में सामूहिक रोजा इफ्तार हुआ.
रोजेदारों ने क्या कहा?
रायगंज के समाजसेवी एडवोकेट मोहम्मद आजम ने कहा कि जिस तरह हम रोजे में खाने-पीने और अन्य कामों से अल्लाह के हुक्म की वजह से रुके रहते हैं उसी तरह हमारी पूरी जिंदगी अल्लाह के अहकाम के मुताबिक होनी चाहिए. हमारी रोजी रोटी और हमारा लिबास हलाल कमाई का हो.
हमारी जिंदगी का तरीका पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सहाबा किराम वाला हो ताकि हमारी रूह हमारे जिस्म से इस हाल में जुदा हो कि हमें, हमारे वालिदैन और सारे इंसान व जिन्नात का पैदा करने वाला अल्लाह हमसे राजी व खुश हो. दारे फानी से दारे बका की तरफ कूच के वक्त अगर हमारा अल्लाह हमसे राजी व खुश है तो इंशाअल्लाह हमेशा-हमेशा की कामयाबी हमारे लिए मुकद्दर होगी कि इसके बाद कभी भी नाकामी नहीं है.
सिक्योरिटी डिपॉजिट में जमा रकम पर जकात लाजिम- उलमा-ए-किराम
1. सवाल : सिक्योरिटी डिपॉजिट में रखी रकम पर जकात का क्या हुक्म है?
जवाब : सिक्योरिटी डिपॉजिट में रखी रकम पर भी जकात फर्ज है.
2. सवाल : क्या जकात रमजान में ही निकाली जा सकती है?
जवाब : जकात का ताल्लुक रमजान से नहीं बल्कि जकात की अदाएगी निसाब भर माल पर साल पूरा होने पर फर्ज हो जाती है. हां, अगर साल रमजान के बाद पूरा होता हो तो साल पूरा होने से पहले रमजान ही में दे दे, तो इसमें सवाब ज्यादा है.
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