उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद में प्रशासन पर्यावरण को लेकर कोई कोताही नहीं छोड़ना चाहता. यही कारण है पर्यावरण प्रदूषित करने में सबसे बड़ा कारण ईंट भट्ठों को माना जाता है, जिसको लेकर जिला प्रशासन के द्वारा चेतावनी जारी कर दी है. मार्च-अप्रैल माह में ईंट भट्ठों का संचालन शुरू हो जाता है, उससे पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा बैठक के दौरान यह चेतावनी जारी की है कि कोई भी भट्टा स्वामी पर्यावरण प्रदूषित करता है और नियमों के विरुद्ध भट्टों को संचालित करता है तो उसके खिलाफ विशेष तौर पर कार्रवाई की जाएगी. जिसको लेकर लगातार भट्ठा स्वामियों की नींद उड़ती हुई नजर आ रही है.
फिलहाल डीएम के द्वारा की गई चेतावनी को लेकर भट्टा स्वामियों में हलचल देखी जारही है. स्थानीय प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है. पिछले काफी समय से प्रदूषण को लेकर दिक्कतें बढ़ने लगी हैं, लिहाजा ऐसे कारकों पर काबू करना बेहद जरुरी हो गया है.
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिले में संचालित ईंट भट्टों पर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी गई है. जिलाधिकारी संजीव रंजन ने कहा है कि स्वस्थ पर्यावरण ही सुरक्षित भविष्य की नींव है. नियमों का पालन कर हम सभी स्वच्छ हवा और बेहतर जीवन के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं. प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के तहत भट्ठों में किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित ईंधन के उपयोग पर पूर्ण रोक लगाई गई है और इसके पालन के लिए लगातार निरीक्षण भी कराया जा रहा है.
आरओ पीसीबी डॉ विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि एनजीटी के आदेशों को लेकर जिले में ईंट भट्ठों का संचालन मार्च से जून के बीच किया जाता है. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जल एवं वायु संबंधी सहमति प्राप्त करने के बाद ही भट्ठों का संचालन अनुमन्य है. वर्तमान में जिले में लगभग 408 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं, जिन पर पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है.
रबर-स्क्रैप टायर-पॉलिथीन प्रतिबंधित
क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा द्वारा बताया गया कि भट्ठों को दी गई सहमति में स्पष्ट शर्त है कि किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित ईंधन जैसे रबर, स्क्रैप टायर, प्लास्टिक, लेदर अथवा अन्य हानिकारक पदार्थ का प्रयोग नहीं किया जा सकता. इन पदार्थों के जलने से वातावरण में जहरीले धुएं का उत्सर्जन होता है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ आमजन के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
लगातार जारी है निगरानी
उन्होंने बताया कि जिले में संचालित ईंट भट्टों का मजिस्ट्रेट एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है. अब तक हुए निरीक्षणों में किसी भी भट्ठे पर प्रतिबंधित ईंधन का भंडारण या उपयोग नहीं पाया गया है. इसके बावजूद निगरानी लगातार जारी है, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भट्ठा संचालकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसी भी भट्टे पर प्रतिबंधित ईंधन का उपयोग या भंडारण पाया गया, अथवा इस संबंध में प्राप्त शिकायत की पुष्टि होती है, तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और संबंधित आख्या जिला प्रशासन के साथ ही शासन व बोर्ड को भेजी जाएगी.
भट्टा संचालकों से अपील
जिला प्रशासन ने भट्ठा संचालकों से अपील की है कि वे स्वच्छ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केवल अनुमन्य ईंधन का ही प्रयोग करें. साथ ही आमजन से भी अनुरोध किया गया है कि यदि कहीं पर्यावरण मानकों का उल्लंघन दिखाई दे तो इसकी सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं प्रशासन को अवश्य उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर प्रदूषण पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके.
खिलवाड़ पर होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी अलीगढ़ संजीव रंजन का साफ तौर पर कहना है कि पर्यावरण के साथ किसी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यही कारण है उनके द्वारा भट्ठा स्वामियों को लेकर चेतावनी जारी की है- कोई भी भट्टा स्वामी मानकों के अनुरूप कार्य नहीं करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी.