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Jharkhand News: लातेहार पुलिस को मिली बड़ी सफलता, 10 लाख का इनामी नक्सली कमांडर मृत्युंजय गिरफ्तार

लातेहार जिला पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए भाकपा माओवादी नक्सली संगठन की कमर तोड़ दी. पुलिस ने माओवादी नक्सली संगठन के जोनल कमांडर 10 लाख का इनामी मृत्युंजय भुइयां और 2 लाख का इनामी सब जोनल कमांडर बबलू को गिरफ्तार कर लिया.

मृत्युंजय भुइयां पर कुल 104 नक्सली हिंसा के मामले विभिन्न थाना क्षेत्र में दर्ज हैं. अलग-अलग नक्सली घटनाओं में 44 पुलिसकर्मियों की हत्या कांड में यह शामिल था. मृत्युंजय लातेहार जिले के छिपादोहर थाना क्षेत्र अंतर्गत नावाडीह चकलवा टोला का रहने वाला है. जबकि बबलू राम बिहार के अरवल जिले के किंजर थाना क्षेत्र का रहने वाला है.

गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

लातेहार एसपी कुमार गौरव को गुप्त सूचना मिली थी कि जोनल कमांडर मृत्युंजय अपने कुछ साथियों के साथ जरूरत के समान को लेने के लिए छिपादोहर थाना क्षेत्र के हरिणामाड़ गांव के आसपास आने वाला है. सूचना के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस की टीम गठित की गई और नक्सलियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की गई. इसी दौरान दो नक्सली मृत्युंजय भुइयां और बबलू राम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इनके पास से एक एके-47 स्वचालित हथियार, 21 गोलियां और 1 लाख 60 हजार रुपए बरामद किए गए.

104 नक्सली हिंसा के मामले का मुख्य अभियुक्त रहा है मृत्युंजय

लातेहार एसपी कुमार गौरव ने बताया कि गिरफ्तार नक्सली मृत्युंजय पर लातेहार समेत दूसरे जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र में नक्सली हिंसा के 104 मामले दर्ज हैं. उन्होंने बताया कि मृत्युंजय लगभग 20 वर्षों से नक्सली संगठन में सक्रिय रहा है. विभिन्न थाना क्षेत्र में हुए मुठभेड़ और हिंसक घटनाओं में यह मुख्य रूप से शामिल रहता था. उन्होंने बताया कि नक्सलियों के खिलाफ पुलिस के द्वारा लगातार अभियान चलाई जा रही है.

इसी अभियान के क्रम में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि इनके दस्ते में शामिल तीन अन्य नक्सली फरार होने में कामयाब हो गए .जिनकी गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है.

झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ तक फैला था मृत्युंजय का साम्राज्य

मृत्युंजय भुइयां करीब दो दशक से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और धीरे-धीरे संगठन में ऊपर उठते हुए जोनल कमांडर बन गया. बूढ़ापहाड़ के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों की उसे पूरी जानकारी थी, इसी वजह से वह लगातार अपना ठिकाना बदलकर सुरक्षाबलों से बचता रहा. यह झारखंड के अलग-अलग जिलों के अलावे छत्तीसगढ़ में भी हिंसक घटनाओं को अंजाम देता था.

साल 2011 में तत्कालीन सांसद इंदर सिंह नामधारी के काफिले पर हमला, जिसमें 11 जवान शहीद हुए थे. साल 2012-13 गढ़वा के भंडरिया में नक्सली हमला, जिसमें थाना प्रभारी समेत 13 जवान शहीद हुए थे. 2013 में लातेहार के बरवाडीह इलाके में मुठभेड़, सीआरपीएफ के 14 जवान शहीद हुए थे. 2017-18 में गढ़वा के पोलपोल इलाके में हमला जिसमें 6 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे. इसके अलावा भी लगभग सभी बड़ी घटनाओं में मृत्युंजय शामिल था.

इन अधिकारियों की भूमिका रही महत्वपूर्ण

नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए छापामारी अभियान में थाना प्रभारी छिपादोहर यकीन अंसारी, गारू थाना प्रभारी जयप्रकाश शर्मा, थाना प्रभारी शशि कुमार, थाना प्रभारी मनोज कुमार, थाना प्रभारी प्रभात दास, थाना प्रभारी अभिषेक कुमार, सब इंस्पेक्टर किशोर मुंडा, इंद्रजीत तिवारी समेत अन्य पुलिस के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही.

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