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LPG Crisis: गैस की कमी से दिल्ली में मंदिर, गुरुद्वारों और अस्पताल के कम्युनिटी किचन प्रभावित, लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना

राजधानी दिल्ली में रसोई गैस सिलेंडर की कमी का असर अब सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पतालों के बाहर चलने वाले कम्युनिटी किचेन, मंदिरों और छोटी-छोटी खाने की दुकानों तक पहुंच गया है. गरीब मरीजों और उनके परिजनों को मिलने वाले मुफ्त खाने पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है.

अस्पतालों के बाहर कम हुई खाने की गाड़ियां

दिल्ली के एम्स और सफदरजंग अस्पताल के बाहर कई सामाजिक संस्थाएं और एनजीओ रोजाना मरीजों के परिजनों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराते हैं. लेकिन सिलेंडर की कमी के कारण इन सेवाओं में कमी आने लगी है.

सेवादारों के मुताबिक पहले यहां रोजाना करीब 15 से 17 गाड़ियां खाना लेकर आती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 7 से 8 गाड़ियों तक रह गई है. इसका सीधा असर उन गरीब परिवारों पर पड़ रहा है जो अस्पताल के बाहर कई दिनों तक रुककर अपने मरीजों का इलाज करवाते हैं और इन्हीं सेवाओं पर निर्भर रहते हैं.

एक सेवादार ने बताया कि गैस सिलेंडर न मिलने की वजह से कई जगह खाना बनाना मुश्किल हो गया है, इसलिए कई गाड़ियां अब बंद हो गई हैं.

इस्कॉन किचेन में लकड़ी के चूल्हे का सहारा

दिल्ली में भोजन सेवा के लिए प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर की रसोई भी इस समस्या से अछूती नहीं है. मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले चार दिनों से गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है.

हालांकि मंदिर की ओर से लोगों को खाना देने की व्यवस्था जारी है, लेकिन गैस की कमी के कारण काम काफी मुश्किल हो गया है.

मंदिरों और दुकानों पर भी पड़ा असर

दिल्ली के कई मंदिरों के बाहर लगने वाली खाने-पीने की दुकानों पर भी सिलेंडर संकट का असर देखने को मिल रहा है. दुकानदारों का कहना है कि फिलहाल वे पहले से बचे हुए स्टॉक से काम चला रहे हैं.

कचौड़ी और सब्जी जैसी चीजें सबसे ज्यादा बिकती हैं, लेकिन गैस न मिलने की वजह से कई दुकानदार सब्जी को गर्म करने के बजाय ठंडी ही परोस रहे हैं.

सिर्फ नमकीन या खाने की दुकानों ही नहीं, बल्कि मिठाई और प्रसाद बनाने वाली दुकानों पर भी इसका असर दिखने लगा है. गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई जगह उत्पादन कम करना पड़ा है, जिससे दुकानदारों को भी नुकसान हो रहा है.

कुल मिलाकर राजधानी में सिलेंडर की कमी का असर अब धीरे-धीरे कई जगहों पर नजर आने लगा है. अगर स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो इसका सबसे ज्यादा असर गरीबों और मरीजों के परिजनों पर पड़ सकता है.

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